न्यामतपुर-उरई। महेबा ब्लाॅक के दमरास गांव में पेयजल समस्या का निराकरण एक दशक से अधिक समय पूर्व जलापूर्ति परियोजना का निर्माण हो जाने के बाद भी नही हो पा रहा है जिससे ग्रामीणों में आक्रोश छाया हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि सन् 2005 में तत्कालीन विधायक डाॅ. अरुण कुमार मेहरोत्रा ने पेयजल समस्या से त्रस्त ग्रामीणों को राहत देने के लिए यहां अपनी निधि से जलापूर्ति योजना को स्वीकृति प्रदान की थी। इसके तहत 80 लाख रुपये की लागत से पेयजल नलकूप व टंकी का निर्माण जेई आरपी चैधरी द्वारा कराया गया। लेकिन खराब गुणवत्ता की वजह से एक भी दिन इस टंकी का उपयोग नही हो सका है। मात्र नलकूप से सीधे जलापूर्ति हो रही है जिससे आधे गांव में पानी नही पहुंच रहा है।
अजीत दोहरे ने बताया कि उनके घर में दो माह तक तो पानी आया लेकिन इसके बाद आपूर्ति ठप्प हो गयी। उनके आसपास कोई हैंडपंप भी नही है जिससे वे बेहद परेशान हैं।
संतराम चैधरी ने कहा कि उनसे आॅपरेटर बिल का पैसा मांगने आ जाता है। जबकि पानी नही आ रहा तो बिल का भुगतान कैसे करें।
आशिक अली ने बताया कि पानी न आने की वजह से आधा किलोमीटर दूर स्थित हैंडपंप से उन्हें पानी भरकर लाना पड़ रहा है। बहरहाल दमरास के लोगों में उनके साथ टंकी निर्माण के नाम पर हुई धोखाधड़ी को लेकर गंभीर रोष छाया हुआ है और जिलाधिकारी से इस मामले में हस्तक्षेप कर ग्रामीणो को राहत दिलाने की मांग की जा रही है।






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