0 घबराये चीफ इंजीनियर ने उरई आकर हड़तालियों के हाथ-पैर जोड़े
0 संविदा कर्मियों के कार्य बहिष्कार से मुख्यमंत्री के निर्देश को पलीता
07orai02 07orai01उरई। बिजली विभाग के संविदा कर्मचारियों ने आज छठवें दिन भी कार्य बहिष्कार कर उपखंड कार्यालय पर धरना जारी रखा। संविदा कर्मियों के लगातार कार्य बहिष्कार के कारण बिजली आपूर्ति लड़खड़ा गई है। उधर मुख्यमंत्री के निर्देश है कि बुंदेलखंड में 24 घंटे आपूर्ति की जाये। इसे देखते हुए संविदा कर्मियों की हड़ताल के कारण विभागीय उच्चाधिकारियों को कहीं मुख्यमंत्री का कोपभाजन न बनना पड़ जाये इस आशंका से उनमें बेचैनी फैली हुई है। मुख्य अभियंता इसी कारण आज दौड़े-दौड़े यहां पहुंचे और संविदा कर्मियों को हड़ताल खत्म करने के लिए मनाते रहे।
गौरतलब है कि संविदा कर्मी उनकी आउटसोर्सिंग करने वाली शिवानी कंस्ट्रक्शन जालौन, राजेश त्रिपाठी कंस्ट्रक्शन उरई, राघवेंद्र कंस्ट्रक्शन कृष्णा इंटर प्राइजेज उरई और नेशनल कंपनी इटावा की शोषण पूर्ण कार्यशैली से खफा हैं। चीफ इंजीनियर से लेकर एई और जेई तक इन कंपनियों के हाथो बिके हुए हैं जिसकी वजह से संविदा कर्मियों से ईपीएफ की जो कटौती होती है उसका कोई अतापता नही है। साथ ही मानदेय के संबंध में जो अनुबंध है उससे कम करके वेतन दिया जा रहा है।
संविदा कर्मी पहले अधीक्षण अभियंता और अधिशाषी अभियंता से अपने साथ हो रहे अन्याय को समाप्त कराने की गुहार लगाते रहे। जब उन्होंने इस पर कोई ध्यान नही दिया तो संविदा कर्मियों ने अनिश्चित कालीन कार्य बहिष्कार का झंडा उठा लिया। संविदा कर्मियों की यूनियन के नेता सुरेश चंद्र ने बताया कि माह नबवंर 2010 से आज तक ईपीएफ की कटौती का रुपया साढ़े तीन करोड़ बनता है। जिसे हजम करके ठेकेदारों और अभियंताओं ने बंदरबाट कर ली है।
मुख्य अभियंता पीके जैन ने चिकनी-चुपड़ी बातें करके संविदा कर्मियों को बहलाना चाहा लेकिन अभी तक वे आंदोलन से विरत होने को तैयार नही हैं। चीफ इंजीनियर कहकर गये है कि तीन दिन के अंदर विभाग के स्तर की मांगें विभाग द्वारा और ठेकेदारों के स्तर की मांगें दबाव डालकर उनके जरिये निस्तारित करा दी जायेगी। पर नाम न छापने की शर्त पर संविदा कर्मियों के एक नेता ने कहा कि चीफ इंजीनियर नंबर एक का बेईमान है। वे विभाग के नही ठेकेदार के कारिंदे हैं ऐसे नमक हराम अधिकारियों पर भरोसा नही किया जा सकता।
चीफ इंजीनियर अवर अभियंताओं के धरने पर भी पहुंचे। हालांकि उन्होंने अवर अभियंताओं की मांग पूरी करने में कोई ज्यादा दिलचस्पी नही ली। उन्होंने अधीक्षण अभियंता एसएस प्रसाद से कहा कि यह मामला उनके और अवर अभियंताओं के बीच का है इसलिए वे खुद ही इसका निदान करें। उधर देर शाम तक अवर अभियंताओं की हड़ताल समाप्त कराने के लिए अधीक्षण अभियंता अपने कार्यालय में उनकी यूनियन के तीन सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल से वार्ता में जुटे थे। जिसमें विशेष भूमिका संविदा पर कार्यरत उनकी महिला सहकर्मी निभा रहीं थी। गौरतलब है कि अधीक्षण अभियंता को जबसे कर्मठ निजी सहायिका मिली है तब से उनकी कार्य कुशलता और विभाग के प्रति समर्पण और बढ़ गया है। वे अपना कार्यालय छोड़कर एसडीओ कार्यालय में निजी सहायिका के साथ बैठ जाते है और तल्लीनता पूर्वक जुटे रहते हैं। उनकी लगन इतनी बढ़ गई है कि कई बार तो वे समय से पहले एसडीओ दफ्तर में पधार चुके होते हैं।

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