उरई। 16 संविदा एएनएम की सेवाएं बहाल रखने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में आज उनके धरने का सातवां दिन था। मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ आशाराम कर्मचारी नेताओं द्वारा उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने से आपा खो बैठे और उन्होंने पुलिस बुला ली। इस दौरान शालीनता की सारी सीमाएं तोड़कर पुरुष पुलिस कर्मियों ने महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की साथ ही उनका समर्थन कर रहे संविदा पुरुष कर्मियों को गिरफ्तार कर कोतवाली ले गये। इसके बाद एएनएम का आंदोलन और तूल पकड़ गया है। उन्होंने एडीएम दफ्तर में पहुंचकर हंगामा काटा। लोगों का आरोप है कि पुरानी संविदा एएनएम को हटाकर नई भर्तियां करने के पीछे भ्रष्टाचार का मामला है जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अलावा प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हैं। नतीजतन सीएमओ की हठधर्मी का समर्थन किया जा रहा है।
एक साल से कार्यरत संविदा एएनएम का नवीनकरण न करके सीएमओ ने नई भर्तियों का विज्ञापन निकलवा दिया जिसके बाद आंदोलन भड़क गया। हटाई जा रहीं एएनएम का कहना है कि महीने की तनख्वाह का आसरा हो जाने से उनकी गृहस्थी संभल गई थी लेकिन सीएमओ के लालच की वजह से नई भर्ती के फैसलें के कारण वे आसमान से नीचे गिरने जैसी चोट महसूस कर रहीं हैं। उनका पूरा परिवार इस आघात से सदमें में है। सीएमओ कार्यालय में धरना देकर उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों व डाॅ आशाराम की आत्मा को जगाने की कोशिश की लेकिन नतीजा सिफर रहा। उन्होंने एएनएम की बाल-बच्चों की दुहाई पर रहम खाने की बजाय आज खूंखार रवैया अपना लिया और धरने को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को बुलावा भेज दिया।
खाकीधारी जाबांजों ने भी महिलाओं के मामले में मर्यादा का ख्याल नही रखा और उनके साथ बदसलूकी शुरू कर दी। अब यह मामला पुलिस के गले की हडडी बन गया है। महिला पुलिस कर्मियों की मौजूदगी के बिना उनके साथ धक्का-मुक्की के मामले में कर्मचारी नेताओं ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग उठा दी है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रामप्रसाद श्रीवास्तव ने डीएम से फोन पर महिलाओं के साथ की गई बेहूदगी पर गुस्सा जताया और कहा कि इस मामले को शासन व महिला आयोग तक ले जाया जायेगा। उधर पुलिस ने मौके से लैब टैक्नीशियन शशिकांत अवस्थी, कंप्यूटर आॅपरेटर नीरज राठौर, एएनएम रविंद्री देवी के पति वीरेंद्र कुमार को हिरासत में लेकर कोतवाली में निरुद्ध कर दिया है। अनीता पाल के भाई नीरज के साथ पुलिस ने झूमा-झटकी की। इन्हीं को छुड़ाने के प्रयास में पुलिस महिलाओं के साथ गुत्थम-गुत्था हो गई। प्रकरण की जानकारी मंडलायुक्त से लेकर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य तक भेज दी गई है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद स्वास्थ्य विभाग की बागडोर संभाले हुए हैं इसलिए यहां विभाग में उत्पन्न हुई अशोभन स्थितियां अधिकारियों को कहीं बहुत भार न पड़ जायें।






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