0 खरीफ के बाद अब रबी फसलों के सूखने की बारी, किसान मायूस
कोंच-उरई। पिछले दो तीन सालों से प्रकृति की मार झेलते आ रहे किसानों के लिये अभी भी सुकून नहीं है, खरीफ की फसल सूखे में तबाह हो जाने के बाद अब रबी की फसल के भी बर्बाद होने के पूरे के आसार हैं। एक ओर जहां बारिश नहीं होने के कारण किसानों को पलेवा करके फसलों की बुबाई करनी पड़ी है तो दूसरी तरफ सर्दी में भी गर्मी के अहसास ने भी खेतों का जायका बिगाड़ कर रख दिया है। वातावरण में नमी का नामोनिशान नहीं है और सिंचाई के लिये नहरों और नलकूपों का संचालन भी ठीक ढंग से नहीं हो पाने के कारण फसलें सूख कर कांटा हो गई हैं।
पिछले साल अतिवृष्टि और ओलावृष्टि जैसी विभीषिकाओं से जूझ कर तबाह और बर्बाद किसानों को इस साल ऊपर वाले से काफी उम्मीदें थीं, हालांकि खरीफ की फसल भी सूखे की भेंट चढ चुकी है जिसके चलते किसानों को लंबी चपत है, यहां तक कि कई घरों में दो वक्त की रोटी के लाले भी हजारों लघु और सीमांत किसानों के सामने हैं और सदमे में कहें या मजबूरी में, सैकड़ों किसानों ने आत्महत्या का रास्ता अख्तियार कर सरकारों और उनकी कार्यप्रणाली तथा किसानों के लिये उनके द्वारा मुहैया कराई गई सुविधाओं और इमदादों पर सवाल खड़े किये हैं। सरकारी घोषणायें भी किसानों को मुंह चिढाती सी लगी हैं, बुंदेलखंड के किसानों के लिये मुख्यमंत्री की चैबीसों घंटे बिजली मुहैया कराने की घोषणा भी हवा हवाई साबित हुई है। हालत यह हैं कि किसानों को ट्यूबवैल चलाने के लिये दो घंटे भी बिजली मयस्सर नहीं है। तमाम सरकारी नलकूपों की हालत खराब है और नहरों के परिचालन का कोई मुकम्मल शैड्यूल नहीं होने के कारण किसान खाली हाथ भगवान भरोसे ही है। आज संवाददाता ने कई इलाकों का दौरा कर खेतों की हालत का जायजा लिया तो किसानों की बदहाली की तस्वीर ही एक बार फिर सामने आई। पानी नहीं मिलने के कारण गेहूं की फसलों का बुरा हाल है, मटर और मसूर या अन्य जिन्सों की भी कहानी यही है। किसानों की मानें तो अब तक पचास फीसदी नुकसान में हैं फसलें और अगर मौसम और सरकारी व्यवस्था ने साथ न दिया तो बची खुची फसलें भी तबाह होने से कोई रोक नहीं सकता है।
इंसेट में-
कोंच के किसान महावीर बताते हैं कि खेतों की नमी गायब है, ओस का भी कहीं अता पता नहीं है और अपर्याप्त बिजली मिलने के कारण नलकूपों की हालत काफी खराब है, बिजली व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है, नहरों का संचालन जब होगा तब तक किसान रसातल में जा चुका होगा।
इनसेट-
ग्राम रामपुर सनेता के किसान धु्रवप्रताप सिंह बताते हैं कि फसलें लगभग पचास फीसदी तबाह हो चुकी हैं और अगर मौसम की यही हालत रही तो बचीखुची फसलें भी हाथों से जाती रहेगीं। उन्होंने मांग की कि प्रशासन सिंचाई में आने बाली दिक्कतों को दूर कर फसलें बचा सकता है।






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