
उग्र भीड़ ने कोतवाली घेरी
हालात काबू में करने को एडीशनल एसपी को भांजनी पड़ी लाठियां
उरई। प्रशासन के ढुलमुल रवैये की वजह से जिले में संवेदनशील हो रहे हालातों के बीच आज उस समय जिला मुख्यालय पर अचानक उपद्रव भड़क उठा जब जिला पंचायत अध्यक्ष फराह नाज के अम्बेडकर चौराहे पर लगे होर्डिंग फाड़े जाने की शरारतपूर्ण घटना के बाद बजरिया से उमड़ी भीड़ ने कोतवाली का घेराव कर लिया। अगर पुलिस ने तुरन्त ही सख्ती न दिखाई होती तो बवाल बहुत ज्यादा बढ़ सकता था।
पिछले कुछ दिनों से जिले के विभिन्न भागों में सांप्रदायिक अशांति के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जिसमें अधिकारियों का नतमस्तक रवैया आग में घी डालने का कारण साबित हो रहा है। विघ्न संतोषियों से मधुर संबंध बनाकर अपनी नौकरी बचाने का वहम पाले अधिकारियों के कारण उनके हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि जिला बारूद के ढेर पर बैठा नजर आने लगा है। आज माहौल अचानक उस समय बिगड़ गया जब फराह नाज के पोस्टर व होर्डिंग अम्बेडकर चौराहे के पास फाड़े जाने लगे। इससे उनके समर्थक भी भड़क गये। नतीजतन चौराहे पर मारपीट शुरू हो गयी। तनाव के कारण दुकानदारों ने दहशत में फटाफट अपने शटर गिरा लिये। इसी बीच घटना का विरोध करते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र बजरिया ने भीड़ के साथ कोतवाली का घेराव कर लिया। इस वजह से शहीद भगत सिंह चौराहे के आसपास भी भगदड़ मच गयी।
आज क्राइम मीटिंग होने की वजह से जिले के सभी 18 थाना कोतवालियों के भार साधक अधिकारी मुख्यालय पर मौजूद थे। उपद्रव की आशंका की खबर आते ही सारे इंचार्जों को कोतवाली पहुंचने के लिये निर्देशित कर दिया गया। इसी बीच अपर पुलिस अधीक्षक शकील अहमद ने फोर्स के साथ आकर मोर्चा संभाला और अंधाधुंध लाठीचार्ज करके उग्र भीड़ को पस्त कर दिया जिससे बवाल टल गया। थोड़ी देर बाद पुलिस अधीक्षक एन कोलांची भी कोतवाली आ गये। उनकी सुरेन्द्र बजरिया के साथ झड़पें हुईं। नाराज होकर उन्होंने सुरेन्द्र बजरिया को कुछ देर के लिये हिरासत में ले लिया। बाद में उन्होंने उनसे तहरीर मांगी। हालांकि इस मामले में दोनों ही पक्ष मुकदमा लिखाने से मुकर गये। शाम को कोतवाली में सिटी मजिस्ट्रेट के सामने एकत्र शहर के इमाम और मौलवियों ने प्रशासन से कहा कि वे मुकदमेबाजी नहीं चाहते लेकिन उपद्रव भड़काने की साजिश में जुटे लोगों पर प्रशासन दबाव बनाये ताकि शहर का अमन चैन बरकरार रह सके।






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