किसानों ने की फुल गेज से नहरें चलाने की मांग

जालौन-उरई। कड़ाके की सर्दी के मौसम में बसंती मौसम होने से किसानों की चिन्ताऐं बढऩे लगी है। मौसम की बेरुखी से परेशान किसानों की फसलें नष्ट होने की कगार पर हैं। क्षेत्रीय किसानों ने नहरें फुल गेज से चलाये जाने की मांग जिला प्रशासन से कीतो किसानों से मौसम के परिवर्तन के लिये हवन पूजन शुरू किया।
जनवरी माह में कड़ाके की सर्दी पडऩे से लोग अपने घरों में दुपके रहते हैं जबकि इस माह में कोहरा तथा बारिस से लगातार तापमान में गिरावट आती रहती थी। लोग सूयज़् देवता के निकलने का बेसब्री से इन्तजार किया करते थे। इस माह में बसन्ती मौसम होने से किसानों कि फसले सूखने लगी है। बडी मुश्किल से किसानो नें पलेवा करे अपनी जमीन की जुताई कर वुवाई कर पाई मौसम के बेरूखी पन से जहां आम आदमी अचम्मित है। तो किसान अपनें सिर पर हाथ रख कर ईश्वर की ओर आश लगा रहा है। दिन प्रतिदिन बढ रही गमीज़् से मौसम बसन्ती बन्ता जा रहा है। जवकि यह मौसम फरवरी माह के मध्य के बाद पडता था। अगर इसी प्रकार एक दो सप्ताह मौसम की बेरूखी रही तो किसी भी किसान की फसल सुरक्षित नहीं रहेगी किसानो द्वारा इन्द्र देवता को प्रसन्न करने के लिये गांव गंाव मन्दिरों पर हवन पूजन शुरू कर दिये है। क्षेत्रीय किसान दीपू गुजज़्र दमॉ, विवेक बादल सुढार, राकेश पचैरी तांवा, गोपाल चंचैदिया सुढार, राधेश उदैनिया खनुआ, गजेन्द्र सिंह चैहान उदोतपुरा, श्यामसुन्दर श्रीवास्तव कैंथ, राधेश्याम पचैरी गिधौसा आदि किसानो ने जिलाधिकारी रामगणेश से फुल गेज से नहरे चलाये जाने की मांग की है। किसानों ने बताया है। कि अगर नेहरों में पानी आ गया तो किसान अपनी फसलों में कृत्रिम वषाज़् तथा पानी लगाकर कुछ दिनों तक फसलो को बचाये रख सकते है। मौसम बदलाव से किसानों के अलावा व्यापारी भी परेशान है। उनके ऊनी कपडे तथा गमज़् रखने वाले इलैक्ट्रिक सामानों की विक्री नहीं हो पा रही है।

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