कोंच-उरई। यहां ब्राह्मण महासभा परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में व्यासपीठ से कथा सुनाते हुये कथा प्रवक्ता पं. नवनीत मिश्र शास्त्री सत्संग के महात्म्य को बताते हुये कहते हैं कि सत्संग के बिना हरिकथा सुनने का सौभाग्य नहीं प्राप्त हो सकता क्योंकि भगवान में दृढ़ प्रेम सत्संग से ही उपजता है, विश्वास होने पर श्रद्धा उत्पन्न होती है तथा विश्वास और श्रद्धा से अंतःकरण शुद्ध होता है।
नगर विद्वत् परिषद् के तत्वाधान में लोक कल्याणार्थ संयोजित शतचंडी एवं श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के दौरान धार्मिक अनुष्ठान जारी हैं। पं. ज्वालाप्रसाद दीक्षित के मुख्य आचार्यत्व तथा पं. ब्रजमोहन तिवारी के संयोजकत्व, संजय रावत के सह संयोजकत्व में शतचंडी कार्यक्रम विद्वान पंडितों द्वारा किया जा रहा है। भागवत कथा में कथा प्रसंग को आगे बढाते हुये कथा व्यास पं. नवनीत मिश्र शास्त्री कहते हैं कि श्रीमद्भागवत सभी मतभेदों का शमन कर समन्वय पैदा करने बाला महान ग्रंथ है, भागवत कथा श्रवण मात्र से ही पापियों के पापों का नाश हो जाता है और उसे सद्गति की प्राप्ति होती है। धुंधकारी को तो प्रेतयोनि से मुक्ति भागवत कथा सुनने से ही मिल गई थी। उन्होंने कहा कि भगवान व्यासजी को भी इसी ग्रंथ की रचना करने के बाद शांति प्राप्त हो सकी थी। उन्होंने परमात्मा के प्रेम भाव को पारिभाषित करते हुये कहा कि जो व्यक्ति जिस रूप में भगवान का स्मरण करता है उसे उसी रूप में भगवान का सामीप्य प्राप्त होता है। कथा व्यास बताते हैं कि सर्वप्रथम भागवत कथा भगवान विष्णु ने ब्यालीस श्लोकों में ब्रह्मा को सुनाई, ब्रह्मा ने नारद को और नारद ने वेदव्यास को, व्यासजी ने अट्ठारह हजार श्लोकों में इस ग्रंथ की रचना की और अपने पुत्र शुकदेवजी को पढाई। यही कथा समय आने पर शुकदेवजी ने राजा परीक्षित को सप्ताह यज्ञ के रूप में सुनाई। इस दौरान ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष देवीदयाल रावत, महामंत्री अनुरूद्ध मिश्रा, लल्लूराम मिश्रा, अखिलेश बबेले, राघवेन्द्र तिवारी, धर्मेन्द्र बबेले, राहुल तिवारी, आनंद दुवे, राजेन्द्र भारद्वाज, सतीश रिछारिया, श्रीनारायण दीक्षित, दिनेश दुवे आदि मौजूद रहे।






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