0 बल्दाऊ धर्मशाला में आयोजित हुआ युवा शक्ति एवं विचार क्रांति सम्मेलन
कोंच-उरई। देश के जानेमाने आईएएस अधिकारी डॉ. सूर्यप्रताप सिंह ने युवाओं को परिवर्तन की मुख्य धुरी बताते हुये कहा कि समाज में व्याप्त विद्रूपताओं और कुरीतियों को मिटाने के लिये युवा शक्ति ही कारगर माध्यम है। युवाओं को अगर सही दिशा दी जाये और उनकी सोच को सकारात्मक दिशा दी जाये तो कोई भी कार्य असंभव नहीं है। यह बात उन्होंने यहां बल्दाऊ धर्मशाला में इप्टा अध्यक्ष मृदुल दांतरे द्वारा संयोजित युवा शक्ति एवं विचार क्रांति सम्मेलन में कही।
उक्त कार्यक्रम में आयोजन समिति की ओर से ऋषि झा, सूर्यदीप सोनी, सुमित झा, मोहित सोनी, शिवम झा आदि ने अतिथियों का स्वागत किया, इप्टा में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि डॉ. सूर्यप्रताप सिंह ने अपने ओजपूर्ण उद्बोधन में युवाओं में वैचारिक क्रांति की आवश्यकता पर बल देते हुये कहा कि आज युवा दिशाहीन है जिसकी वजह से वह सही और गलत के बीच अंतर नहीं कर पा रहा है, ऐसी स्थिति अत्यंत ही संवेदनशील होती है और अगर उसे सही दिशा तथा सकारात्मक सोच न मिली तो वह विध्वंसक स्थिति में पहुंच जायेगा। राजनैतिक रूप से भी युवाओं का केवल उपयोग ही किया गया है, नेताओं ने अपने अपने हिसाब से उसकी उपयोगिता देखते हुये फुटवॉल बना कर रख दिया है। युवाओं को आज एकजुट करने की जरूरत है, साथ ही उन्हें रचनात्मकता से भी जोडना होगा ताकि वे देश और समाज के विकास में अपना योगदान दे सकें। बतौर विशिष्ट अतिथि कृपाशंकर द्विवेदी बच्चू महाराज तथा प्रधानाचार्य परिषद् के प्रांतीय उपाध्यक्ष ब्रजबल्लभ सिंह सेंगर ने शिरकत करते हुये अपनी बात रखी, कहा कि युवा पीढी को बहुत ही गंभीरता से लेने, उनके मनोभावों को समझने और उसमें सही गलत का विभेद करते हुये उन्हें समझाने की आवश्यकता है ताकि वे सही दिशा में काम कर सकें। संचालन मृदुल दांतरे ने किया। इस दौरान प्रोफेसर वीरेन्द्रसिंह, सुनीलकांत तिवारी, नरोत्तमदास स्वर्णकार, केके मिश्रा, मंगलसिंह जादौन, अनिल पटैरया, मिरकू महाराज, डॉ. एलआर श्रीवास्तव, अनिल वैद, राहुल तिवारी, पवन खिलाड़ी, राघवेन्द्र तिवारी, राघवजी गुर्जर, वैदेहीशरण लौहकर, अंजनीकुमार दीक्षित, कन्हैया नीखर, अमरेन्द्र दुवे, सचिन शुक्ला, राजेन्द्र निगम, प्रह्लाद सोनी, संतोष तिवारी, ओंकारनाथ पाठक, कमलेश गुप्ता, एसपी सिंह, आकाश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।






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