भाविप ने युवा दिवस के रूप में मनाई विवेकानंद जयंती, भगवा पगडियों से किया अतिथियों का सम्मान
कोंच-उरई। जिलाधिकारी रामगणेश ने विवेकानंद जयंती पर कहा कि परिवर्तन के लिये युवाओं को रचनाधर्मी होना पड़ेगा। इसके साथ ही युवाओं को निर्भीक होने की जरूरत है, डरा सहमा युवा एक सामान्य जिंदगी तो जी सकता है लेकिन उससे किसी परिवर्तन की उम्मीद नहीं की जा सकती है। उक्त उद्गार उन्होंने सामाजिक संस्था भारत विकास परिषद् द्वारा आयोजित स्वामी विवेकानंद जयंती पर व्यक्त किये।
सामाजिक संस्था भारत विकास परिषद् ने मंगलवार को यहां बल्दाऊ धर्मशाला में स्वामी विवेकानंद की जयंती युवा दिवस के रूप में मनाई। एसडीएम संजयकुमार सिंह, सीओ मनोजकुमार गुप्ता, पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि विज्ञान विशारद सीरौठिया, डॉ. नीता रेजा, प्रोफेसर वीरेन्द्रसिंह, शाखा अध्यक्ष राजेन्द्र निगम, प्रह्लाद सोनी आदि मंचस्थ रहे। जयंती कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये जिलाधिकारी ने कहा कि युवाओं के लिये समय बहुत ही कीमती होता है क्योंकि उसके पास समय बहुत कम होता है जिसमें उसे बहुत कुछ निर्धारित करना होता है। उसे अपना लक्ष्य निर्धारित करना होता है कि वह देश और समाज के लिये क्या कर सकता है। उन्होंने अभिभावकों को इंगित करते हुये कहा कि बश्चों ने अगर कोई काम गलत भी किया है तो उन्हें डराने धमकाने के बजाये प्यार मोहब्बत से समझायें कि सही क्या है और गलत क्या। उन्होंने कहा कि युवाओं में जोश और होश दोनों होने के साथ साथ देश के प्रति समर्पित भाव से काम करने की ललक होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि युवाओं को नई सोच और नवीनता की जरूरत है, उसे जो भी करना है निर्भीकता से करना है तभी वह इच्छित परिवर्तन लाने में सफल हो सकता है। भारत विकास परिषद् द्वारा पूर्व में आयोजित प्रतियोगिताओं के सफल प्रतिभागियों सुमित निरंजन, हिम्मत सिंह को डीएम ने प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि विज्ञान विशारद सीरौठिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब तक युवाओं का बौद्धिक विकास नहीं होगा तब तक देश और समाज के विकास की कल्पना करना बेमानी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने भीतर सदाचार, सुविचार और संस्कार जैसे गुणों का समावेश करना होगा तभी भारत विश्व गुरू बन सकता है। युवा अपने अंदर की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकाल फेंकें और सकारात्मक ऊर्जा तथा विचारों को आत्मसात् करें, ऐसा तभी सम्भव है जब हम आत्मचिंतन करेंगे। स्वामी विवेकानंद ने भी यही दर्शन युवाओं को दिया है। संचालन मृदुल दांतरे ने किया। इससे पूर्व नरोत्तमदास स्वर्णकार ने वंदेमातरम गीत सस्वर गाकर कार्यक्रम को गति प्रदान की। सूर्यदीप सोनी, अमरेन्द्र दुवे, वसीम अहमद, दिनेश सोनी, शाहनवाज शानू, विकार अहमद, कन्हैया नीखर, माधुरी पहारिया, प्रार्थना रेजा, नरेन्द्र द्विवेदी, नरेन्द्र मयंक आदि ने अतिथियों का स्वागत किया, सेठ बद्रीप्रसाद स्मृति महाविद्यालय की छात्राओं ने वाणी वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत किये। इप्टा रंगकर्मियों ने एकांकी प्रस्तुत कर आज की सांम्प्रदायिक बुराई पर कड़े प्रहार किये। इस दौरान कोतवाली के एसआई राजेन्द्रप्रसाद द्विवेदी, गजराजसिंह सेंगर, कृपाशंकर द्विवेदी बश्चू महाराज, सुरेन्द्र नायक, डॉ. दिनेश उदैनिया, मुन्नालाल अग्रवाल लोहेबाले, अखिल वैद, मोहनदास नगाइच, डॉ. एलआर श्रीवास्तव, सुनीलकांत तिवारी, हल्केसिंह बघेल, देशराजसिंह जादौन, दिनेश मानव, प्रभूदयाल गौतम, संतोष तिवारी, महेन्द्र निगम, श्रीकांत गुप्ता, राघवजी गुर्जर, ओंकारनाथ पाठक, भास्करसिंह माणिक्य, रामनरेश रमन, काजी मुईनउद्दीन, कालीचरण झा, चतुर्भुज चंदेरिया, डॉ. प्रदीप अग्रवाल, डॉ. आनंद शर्मा, राजीव रेजा, नासिर मंसूरी, नरेन्द्रकुमार द्विवेदी, नंदराम स्वर्णकार आदि मौजूद रहे।
जबाब प्यार हो हर हल सवाल हो जाये…
अपनी अनूदित रचनाओं से कवियों ने बांधा समां
कोंच-उरई। स्वामी विवेकानंद जयंती के इस कार्यक्रम में चार चांद लगाने के लिये आयोजित काव्यगोष्ठी की अध्यक्षता श्रीकांत गुप्ता ने की। कवि एवं रचनाकार रामनरेश रमन मोंठ ने अपनी रचना बांची, श्मौका लेके बात का जो रमन आघात करे, तो अबके जबाब माकूल देना चाहिये, जान गया विश्व पूरा भर चुका पाप घट, सीमा पार जाके उसे फोड़ देना चाहिये।्य संजीव कुलश्रेष्ठ पुखरायां की यह रचना काफी सराही गई, जबाब प्यार हो हर हल सवाल हो जाये, अपनी दुनिया ऐ दोस्त बेमिसाल हो जाये, न सरे राह लुटे दामिनी सी अस्मत फिर, कुछ नये साल में ऐसा कमाल हो जाये। व्यंग्यकार हरनाथ सिंह चैहान बामौर की व्यंग्य रचना, मैंने पत्नी से कहा इधर आईये, नये वर्ष पर क्या गिफ्ट दूं बताईये, वो बोली, बस दो रूपये का रूमाल दे दो और उसमें बांध कर दो किलो अरहर की दाल दे दो.. को खूब भाव मिला। वहीं हेमा बुखारिया ने रचना को अपने शब्दों में गूंथते हुये कहा, मुझे गर्व है शहीदों में नाम आ गया, बेटा हमारा देश के कुछ काम आ गया..। निधि ने मौजूदा हालातों पर करारे कटाक्ष करते हुये रचनापाठ किया, शजर बड़े तो हैं मगर बड़ा कहूं कैसे, अगर न छांव मिले और न चैन पाये कोई.। महेन्द्र मिहोनवी ने अपनी रचना बांची, मिल कर कुछ तरीका निकालो चुस्ती लाओ हुनर में, दहशत में है सारा कुनवा सांप घुसा है घर में..। इस दौरान प्रेम चैधरी नदीम, डॉ. एलआर श्रीवास्तव विंदु, डॉ. हरिमोहन गुप्त, दिनेश मानव, ओंकारनाथ पाठक ओम, मोहनदास नगाइच, नरोत्तमदास स्वर्णकार चातक, ंदराम स्वर्णकार आदि कवि भी मौजूद रहे।
फोटो-12 उरई16-मंचस्थ कविगण






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