उरई। मकर संक्रान्ति के पर्व पर श्रद्धालुओं ने आज भोर होने के पहले ही नदियों और तालाबों में स्नान कर खिचड़ी दान किया। शहर में जगह-जगह मंगोड़े, खिचड़ी और तिली के लडडुओं का भण्डारा आयोजित किया गया।
मकर संक्रान्ति के उपलक्ष्य में कालपी और जगम्मनपुर स्थित पंचनद में हजारों श्रद्धालुओं ने कालिन्दी में बुड़की लगाकर भगवान की पूजा अर्चना की। उधर कोटरा, कहटा, सैदनगर, मुहाना में बेतवा का स्नान करने के लिए भी सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सभी नदी घाटों पर सुरक्षा के लिए पुलिस का व्यापक बंदोबस्त किया गया था। जो लोग पुण्य सलिला नदियों में स्नान करने नही पहुंच सके उन्होंने घर में ही हैंडपंप या नल के पानी से बड़े तड़के स्नान करने के बाद ही दैनिक जीवन की शुरूआत की।
मकर संक्रान्ति के कारण आज मौसम का मिजाज भी सुबह अचानक बदल गया। दोपहर तक लोगों को सूर्य देव के दर्शन नही हुए और कोहरा छाया रहा। ठंडक भी अचानक काफी बढ़ गई। हालांकि लोगों की आस्था मौसम की चुनौती पर भारी साबित हुई इसलिए मौसम बिगड़ जाने के बावजूद इस पर्व पर सुबह-सुबह स्नान की परंपरा को निभाने में लोगों ने बिल्कुल भी पीठ नही दिखाई। धार्मिक विधान के अनुसार गृहस्थों ने पुरोहितों और साधुओं को खिचड़ी दान किया। आज के दिन मंगोड़े और तिल के लडडू खाने का सगुन होता है। इसलिए घर-घर में मंगोड़े और लडडू बनाये गये। शहर के प्रमुख मंदिरों में खिचड़ी, मंगोड़े और तिल के लडडू का प्रसाद बाटा गया।
दोपहर में आज कुछ देर के लिए धूप निकलने पर लोगों ने राहत की सास ली। लेकिन शाम ढलते-ढलते मौसम फिर जैसे का तैसा हो गया। जिससे बाजार आने-जाने वाले लोगों को कंपकपाते देखा गया।






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