उरई। गाय को खिलाए चारा बढ़ाए भाईचारा का उदघोष करते हुए हिन्दू-मुस्लिम दोनों संप्रदाय के बुद्धिजीवियों, धर्माचार्यों और समाजसेवियों ने आज पूरे शहर में चैराहे-चैराहे पर भूख से बेहाल भटक रहीं लावारिस गायों को हरा चारा खिलाकर अन्य लोगों को प्रेरित करने की कोशिश की।
अन्ना गायों की समस्या ने जिले में विकराल रूप धारण कर लिया है। एक ओर तो किसान इनसे अपनी खड़ी फसल के चट हो जाने के खतरे के अंदेशे में त्रस्त हैं दूसरी ओर यातायात में भी भीषण व्यवधान की स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं। लावारिस गायों के रेवड़ साम्प्रदायिक तनाव के लिए भी उददीपक साबित हो रहे हैं। दूसरे समुदाय के कसाइयों द्वारा लावारिस घूम रहीं गायों को जबरन वाहनों में ठूसकर वध के लिए ले जाये जाने की अफवाह गरम रहती हैं जो एक समुदाय के आस्थावान लोगों को विचलित कर देती हैं और कभी-कभी उनका उद्वेलन विस्फोटक रूप तक धारण कर जाता है। यही स्थिति तब पैदा होती है जब किसी लावारिस गाय की मौत संदिग्ध हालातों में हो जाती है। इन संगीन स्थितियों के बावजूद प्रशासन अभी तक इस समस्या के निदान के नाम पर असहाय ही बना हुआ है।
इसी बीच समाज के प्रमुख लोगों की ओर से किसी सार्थक पहल के लिए हो रहे तकाजे के बीच ठड़ेश्वरी मंदिर के पुजारी सिददन महाराज, ट्रक आॅपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष अपना सगीर को साथ लेकर लावारिस घूम रहीं गायों को हरा चारा खिलाने के लिए निकल पड़े उनके साथ दर्जनों अन्य समाजसेवी रहे। सिददन महाराज और अपना सगीर ने अपने पीछे चारे से भरी ट्रैक्टर-ट्राली लेकर कोंच बस स्टैण्ड से अर्चना पैलेस टाकीज तक पद यात्रा की और जहां भी उन्हें गायों के झुंड दिखे वहीं रुककर उन्होंने उनको पेट भर जाने तक चारा खिलाया। बाजार के लोग कौतुक नजरों से इस पहल को देखते रहे। कई लोगों ने इस पहल से प्रभावित होकर स्वयं भी इसका अनुकरण करने का निश्चय किया है। जिससे आने वाले दिनों में गौ संरक्षण के लिए प्रभावी अभियान का आगाज होने के आसार दिखने लगें हैं।






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