cropped-12065564_1515048802143994_20145587447710710_n.jpgउरई। प्रदूषण को लेकर केंद्र से लेकर राज्य तक की हुकूमतें कितनी भी संजीदा और फिक्रमंद क्यो न हों लेकिन स्वास्थ्य विभाग को इसकी कोई परवाह नही है। यह विभाग बनाया तो लोगों की सेहत सुधारने के लिए है लेकिन अपनी उल्टी कार्यप्रणाली की वजह से इसके द्वारा लोगों में बीमारी की सौगात बांटी जा रही है।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में चलने वाला जनरेटर इसकी गवाही देता है। बाबा आदम के जमाने के इस जनरेटर में कोई साइलेंसर नही है। जिसकी वजह से सीएमओ कार्यालय में आने-जाने वालों के कान के पर्दे जनरेटर की गड़गड़ाहट से फड़फड़ाते रहते हैं। इसके अलावा यह जनरेटर कार्बन डाई आक्साइड का भरपूर धुंआ उगलता है। जिससे लोगों को सास लेना मुश्किल हो जाता है।
सीएमओ दफ्तर परिसर में डाॅक्टरों और कर्मचारियों की और पिछवाड़े आम लोगों की काॅलौनी हैं जो जनरेटर की वजह से परेशान हैं। कई बार सीएमओ दफ्तर के अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया जा चुका है। लेकिन प्रदूषण रहित जनरेटर स्थापित कराने की पहल की कोई कोशिश अभी तक शुरू नही हुई है। चिढ़े हुए लोग अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के यहां तक इसकी शिकायत ले जाने की योजना बना रहे हैं।

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