सूखा राहत का तकरीबन बत्तीस लाख रूपया फर्जीवाड़े के तहत निकाला गया था
जांच की जारी गति बताती है कि मामला सालों चल सकता है
कोंच-उरई। गुजरे साल तहसील में किसानों के लिये आये शासन के धन में से तहसील के कर्मचारियों की मिलीभगत से तकरीबन बत्तीस लाख रूपये चेकों के जरिये बैंक से निकाल कर उदरस्थ कर लिये गये थे। इस राहत घोटाले में बुधवार को एक और आरोपी पुलिस के हत्थे चढा है, इस तरह अब तक इस मामले में छह लोग गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। जांच कब तक जारी रहेगी, इसे लेकर कयास लगाया जा रहा है कि इसकी गति को देखते हुये अभी इसमें सालों का वक्त लग सकता है। जांच अधिकारी के मुताबिक इस मामले की जांच तीन चरणों में हो रही है और यह गिरफ्तारियां अभी पहले चरण से ही बाबस्ता है, यानी अगले दो चरणों को अभी छुआ तक नहीं गया है।
कोतवाली पुलिस के एसएसआई हरेन्द्रसिंह ने आज सुबह कोतवाली क्षेत्र के ग्राम परैथा में दबिश देकर एक युवक को गिरफ्तार किया है। बताया गया है कि उक्त युवक तहसील में गत बर्ष हुये सूखा राहत घोटाले से जुड़ा है। हालांकि पकड़ा गया आरोपी सीधे सीधे एफआईआर में नामजद नहीं है लेकिन बकौल पुलिस जांच में इसकी भूमिका भी निकल कर सामने आई है। पकड़े गये युवक शिवा उर्फ जितेन्द्र पटेल पुत्र रामशंकर निवासी ग्राम परैथा ने तकरीबन दर्जन भर लोगों को चेकें देकर उनके खातों से सरकारी पैसा निकलवाया है। इस प्रकार इस कांड में अब तक छह लोग जेल जा चुके हैं जिनमें दो सरकारी कर्मचारी/ लेखपाल भी शामिल हैं। मामले की जांच कर रहे एसएसआई हरेन्द्रसिंह ने बताया है कि इस मामले की जांच तीन चरणों में चल रही है जिसमें अभी पहला चरण ही लगभग पूरा हो सका है और मामले के तीन आरोपी लेखपाल अनिल निरंजन, लेखपाल अभय तथा रामू पटेल पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं, दो लोगों अनूप तिवारी, अखिलेश निरंजन ने कोर्ट में सरेंडर किया है और छठवां आरोपी शिवा आज जेल जा रहा है। गौरतलब यह भी है कि प्राथिमिकी में आरोपित किये गये तीन लोगों पवन रायकवार, राकेश व उमेशचंद्र पटेल अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। जांच अधिकारी के मुताबिक यह तीनों भी दूसरे चरण के एक्यूज हैं, दूसरे चरण में तहसील और बैंक जांच की परिधि में होंगे जबकि तीसरे चरण में वे खाताधारक हैं जिनके खातों के मार्फत धन की निकासी की गई है। उन्होंने बताया है कि विभिन्न बैंकों से सूचियां मांगी गई हैं जबकि भारतीय स्टेट बैंक शाखा ने 131 चेकों का ब्यौरा पुलिस को दिया है। बहरहाल, अपने तरह का यह दूसरा ऐसा घोटाला है जो सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से अंजाम देकर लाखों के सरकारी धन को चूना लगाया गया है।
क्या है यह पूरा मामला..?
कोंच-उरई। गौरतलब है कि कोंच के निवर्तमान तहसीलदार दुर्गेश यादव जो अब उरई सदर का कार्यभार देख रहे हैं, ने कोंच से 10 जुलाई को अपना कार्यभार छोड़ा था और नये तहसीलदार जितेन्द्रपाल ने उसी दिन यहां कार्यभार ग्रहण किया था। नये तहसीलदार के हस्ताक्षर भी बैंक में पहुंच चुके थे। चूंकि सूखा राहत का कार्य अभी भी जारी था और किसानों को मुआबजे की रकम का वितरण भी किया ही जा रहा था, सो बैंक में इस तरह के चेक रूटीन में आते रहते हैं और बैंक भी इस काम में उदारता पूर्वक उनके भुगतान करता रहा है। इसी बीच दुर्गेश के हस्ताक्षर से 13 जुलाई की तारीख में चेक जारी कर दिया गया। जो बैंक में पकड़ा गया, बस यह एक चेक ही इस समूचे घोटाले की गहराई नापने लगा। अधिकारियों को सांप सूंघ गया और फिर युद्घ स्तर छानबीन शुरू हो गई। अधिकारियों के होश यह देख कर उड़ गये कि यह मात्र एक-दो या चार-छह चेकों का नहीं है बल्कि कई महीनों से यह खेल चल रहा है। तहसील के मालखाने में चेकों का लेखाजोखा जब संभाला गया तो अधिकारियों के हाथों के तोते उड़ते दिखे, मालखाने से सौ-सौ की पूरी नौ चेकबुक यानी नौ सौ चेक गायब मिली। निवर्तमान तहसीलदार भी पसीना फेंकते हुये कोंच पहुंचे और उन्होंने शुरूआती साक्ष्यों के आधार पर दो लोगों पवन रायकवार व राकेश के खिलाफ 5 सितंबर को कोतवाली में एफआईआर दर्ज करा दी, इसके बाद एक सप्लीमेंट्री एफआईआर लेखपाल अभयसिंह की ओर भी तीन लोगों पवन रायकवार, राकेश व उमेशचंद्र पटेल के खिलाफ लिखाई गई। कोतवाली में दर्ज एफआईआर के बाद जारी पुलिस कार्यवाही के भय के साथ तहसील प्रशासन द्वारा हड़काये जाने के बाद से खातेदारों से पूरी रकम लगभग बत्तीस हजार रूपये जमा कराये जा चुके हैं।







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