जवानी में मिली सजा टल रही थी, बुढ़ापे में वारन्ट आया तो दे दी जान

उरई। 32 साल पहले जिसे हत्या के आरोप में सेशन कोर्ट से सजा दे दी गयी थी लेकिन हाईकोर्ट में दायर अपील में जमानत मिल जाने की वजह से वह जेल से बाहर था। हाल ही में लगातार तारीखों पर गैर हाजिर रहने की वजह से उसके खिलाफ वारन्ट जारी हो गया। बुढ़ापे में जेल जाने के डर से उसे इस कदर सदमा लगा कि उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
1983 में कैलिया थाने के देवगांव निवासी जियालाल को सेशन कोर्ट से हत्या के एक मामले में दोष सिद्ध करार देकर 20 साल की सजा सुना दी गयी थी लेकिन उसने हाईकोर्ट में अपील दायर कर जमानत ले ली। तब से यह अपील विचाराधीन थी और इस बीच जियालाल की उम्र 65 साल हो गयी थी। उसे अंदाजा नहीं था कि उम्र के अन्तिम पड़ाव में फिर उसे सींखचों के भीतर होने की नौबत आ जायेगी। हाईकोर्ट में कई तारीखों में न पहुंच पाने की वजह से उसके खिलाफ वारन्ट जारी हो गया। जिसके कैलिया थाने में तामीली के लिये आने पर जियालाल को जानकारी हुई तो वह बुढ़ापे में जेल के भीतर होने की कल्पना से इतना बेचैन हो गया कि उसने परिजनों को बताये बिना रात में फांसी पर लटककर आत्महत्या कर ली।

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