0 मरहमपटटी के लिए पहुंचे सांसद को भी सुनाई खरी-खरी
कुठौंद-उरई। इलाहाबाद बैंक की स्थानीय शाखा में बैंक के स्टाफ और रंधीरपुर के एक चर्चित दलाल की सांठगांठ से दर्जनों खातेदारों के लाखों रुपये निकालकर हड़पे जाने के मामले में प्रभावी कार्रवाई न होने से नाराज क्षेत्र के लोगों ने आज बैंक के सामने फटटा बिछाकर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान पहुंचे भाजपा सांसद को भी लोगों की खरीखोटी सुननी पड़ी।
इलाहाबाद बैंक की स्थानीय शाखा में हुए घोटाले की वजह से क्षेत्र के गरीब किसान बर्बाद होकर सड़कों पर आ गये हैं। कई किसान तो धोखा खाने के बाद डिपे्रसन की इतनी गंभीर हालत में हैं कि अगर उन्हें संभाला न गया तो वे अपने साथ अनहोनी घटना भी कर सकते हैं। पहले कुछ किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड के फर्जी कागज बनाकर उनके नाम से रुपये निकाल लिये गये। नोटिस पहुंचने के बाद जब उन किसानों को पता चला तो उन्होंने लीड बैंक प्रबंधक सिद्धार्थ पाॅल से लेकर बैंक के प्रबंधन मे शिखर स्तर तक शिकायत की लेकिन कहीं से कोई कार्रवाई नही की गई। इस बीच कई सामान्य खातेंदारों की जमा राशि भी गायब हो गई। फिर भी प्रशासन और बैंक प्रबंधन का रवैया ढीलाढाला बना रहा जिसके कारण आज क्षेत्रीय लोग सामूहिक रूप से बैंक के सामने धरने पर बैठ गये।
इलाके के भ्रमण पर गये भाजपा सांसद भानुप्रताप वर्मा, जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल व अन्य पार्टी नेताओं के साथ धरने पर बैठे लोगों के बीच उनसे हमदर्दी जताने को पहंुचे तो कुछ लोगों ने उन्हें भी खरी-खोटी सुनाने में परहेज नही किया। लोगों ने कहा कि केंद्र में ंभाजपा के नेता भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन कायम करने का दावा कर रहे हैं जबकि किसानों के साथ इतने बड़े पैमाने पर हुई धोखाधड़ी को लेकर जिस तरह से केंद्र द्वारा संचालित बैंकों में विजीलेंस व अन्य नियंत्रक मशीनरी की अकर्मण्यता सामने आई है उससे वे दंग रह गये हैं। उन्हें यह एहसास हुआ है कि भ्रष्टाचार रोकने वाली केंद्रीय संस्थायें शोपीस बनकर रह गई हैं यह बेहद दुखद अनुभव है। अगर बैंक विजीलेंस कारगर होता तो बैंकों के अधिकारी किसानों को इस तरह लुटवाने का काम नही कर पाते। कई लोगों ने कहा कि यह मामला अकेली इलाहाबाद बैंक और कुठौंद शाखा का नही है बल्कि सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों में अधिकारी बेलगाम होकर काम कर रहे हैं। स्वरोजगार के मामले हो या स्टूडेंट लोन के किसी बैंक से बिना कमीशन लिये ऋण सहायता नही मिल पाती। लोगों ने सांसद से कहा कि आपको केवल सरकारी खर्च से शादियों और त्रयोदशियों के निमंत्रणों में जाना आता है इसके अलावा आपकी जनता की समस्याओं का निदान कराने में कोई दिलचस्पी नही है।
सांसद काफी देर तक सफाई देते रहे इसके बाद उन्होंने मौके पर ही थानाध्यक्ष जाकिर हुसैन और एलडीएम सिद्धार्थ पाॅल को बुलवा लिया और कहा कि धोखे के शिकार किसानों का एक-एक पैसा दिलवाया जायेगा। ग्रामीण एलडीएम पाॅल से बुरी तरह नाराज थे। उनका कहना था कि अगर सांसद चाहते है कि जिले में बैंक किसानों के काम आये और इसके लिए साफ-सुथरा बैंक प्रशासन जरूरी है तो काठ के उल्लू की तरह काम करने वाले नाकारा सिद्धार्थ पाॅल की बजाए किसी सक्षम एलडीएम को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में कहकर जिले में नियुक्त करायें।







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