0 यूपी भर में अदालतों की हैसियत बढाई गई
22orai04कोंच-उरई। अभी तक सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में 25 हजार तक के सिविल वाद सुनने के जो अधिकार थे उन्हें बढा कर अब 5 लाख कर दिया गया है। अदालत की हैसियत में हुई इस बढोत्तरी का लाभ निश्चित रूप से वादकारियों को मिलेगा और उन्हें उरई तक की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इस आशय की जानकारी आज बारसंघ अध्यक्ष विनोद अग्निहोत्री ने जिला जज से प्राप्त पत्र के हवाले से देते हुये कहा कि इससे जहां कोंच के अधिवक्ताओं को काम मिलेगा वहीं वादकारियों की अनावश्यक दौड़धूप बचेगी।
बार लाईब्रेरी में पत्रकारों से बातचीत करते हुये अग्निहोत्री ने बताया कि जिला जज नंदलाल द्वारा दिनांक 20 जनवरी को बार एसोसियेशन को भेजे गये पत्र में अवगत कराया गया है कि माननीय हाईकोर्ट के आदेश एवं उत्तरप्रदेश गजट दिनांक 1.12.15 द्वारा सिविल जज जूनियर डिवीजन का क्षेत्राधिकार बढा दिया गया है। बंगाल, आगरा एवं आसाम सिविल कोर्ट एक्ट 1887 में संशोधन करते हुये धारा 19 की (ए) उपधारा 1 में 10 हजार के स्थान पर 1 लाख रखा गया है, (बी) उपधारा 2 में 25 हजार के स्थान पर 5 लाख रखा गया है तथा प्रधान एक्ट के धारा 21 की उपधारा 1 के बी में (ए) 1 लाख के स्थान पर 5 लाख तथा (बी) 5 लाख के स्थान पर 25 लाख कर दिया गया है। इसके अलावा अध्याय 3 में प्रांतीय लघुवाद न्यायालय 1887 में हुये संशोधन में (ए) उपधारा 2 में 5 हजार के स्थान पर 25 हजार तथा (बी) उपधारा के परंतुक में 25 हजार के स्थान पर 1 लाख किया गया है।
बारसंघ अध्यक्ष ने इस स्थिति को अधिवक्ताओं के व्यापक हित में करार देते हुये कहा कि यूपी भर के अधिवक्ता विगत कई वर्षों से इसके लिये प्रयासरत थे और समय समय पर पत्राचार करते रहे हैं। उन्होंने भी गुजरी 3 अक्टूवर को प्रशासनिक न्यायमूर्ति इलाहाबाद हाईकोर्ट को पत्र भेज कर तथा इससे पूर्व भी कई बार पत्राचार किये गये थे जिन पर सदाशयतापूर्वक विचार कर न्याय विभाग ने वादकारियों और अधिवक्ताओं को यह सौगात दी है। इस दौरान एल्डर्स कमेटी के बरिष्ठ सदस्य महंत ब्रजभूषणदास, कुलदीप निरंजन, ओपी अग्रवाल जूनियर, असित मिश्रा, अनिल पटैरया, दीपक मिश्रा आदि मौजूद रहे।

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