0 जल्लाद कोतवाल डीडीएस राठौर ने उतारा था तीन को मौत के घाट
कोंच-उरई। पहली फरवरी बर्ष 2004 कोंच के इतिहास के पन्नों में काले दिन के रूप में दर्ज है। इसी दिन तत्कालीन कोतवाल डीडीएस राठौर ने क्षेत्र की तीन हस्तियों को निर्दोष होते हुये भी केवल इसलिये मौत के घाट उतार दिया था कि उन्होंने कोतवाल की निरंकुशता और मनमानी पर सवाल खड़े करने और निर्दोषों को रात भर लॉकअप में बंद रखने का विरोध किया था।
बारह साल का लम्बा अंतराल कोतवाली में घटी उस वीभत्स घटना में मारे गये महेन्द्र सिंह निरंजन, सुरेन्द्रसिंह निरंजन और दयाशंकर झा की मौत को अनहोनी समझ कर भुलाने के लिये भले ही काफी माना जाता हो लेकिन उन घावों के निशानों का क्या जो जब भी सामने आते हैं, उस काले दिन की बुरी यादें बरबस ही लोगों के जेहन में उतर कर रीढ में सिहरन पैदा कर देती हैं। दरअसल, 31 जनवरी 2004 की रात तत्कालीन कोतवाल डीडीएस राठौर ने वरिष्ठ सपा नेता और एमपीडीसी प्रबंध समिति के तत्कालीन मंत्री सुरेन्द्रसिंह निरंजन के दामाद को अकारण ही रात भर कोतवाली के लॉकअप में बंद रखा था और पहली फरवरी को जब कोतवाल से इसका हिसाब मांगा गया तो उन्हें इसमें अपनी तौहीन लगी और उन्होंने सुरेन्द्रसिंह, उनके बड़े भाई रोडवेज कर्मचारी यूनियन के मंडलीय पदाधिकारी महेन्द्र सिंह निरंजन तथा उनके अभिन्न मित्र दयाशंकर झा पर कोतवाली में गोलियों की बौछार कर तीनों को मौत की नींद सुला दिया था। इस घटना के बाद तो जैसे जिले भर में आग सी लग गई और जगह जगह धरना प्रदर्शन आगजनी आदि की घटनाओं से पूरा जिला कई दिनों तक सहमा रहा था। कोतवाली में घटी उस काली वारदात के बाद भले ही जाने बाले वापिस न आ सकें लेकिन उनके कृत कार्यों को याद कर इलाकाई लोग आने वाली पीढियों को पुलिस की ज्यादती के खिलाफ आवाज बुलंद करने की नसीहत जरूर देते हैं। कल कोतवाली कांड की 12वीं बरसी पर तीनों शहीदों के नाम पर संचालित महेन्द्रसिंह, सुरेन्द्रसिंह, दयाशंकर मेमोरियल महाविद्यालय तीतराखलीलपुर में उन्हें याद करने के लिये कार्यक्रमों की लम्बी श्रृंखला तैयार की गई है।







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