उरई। एक ओर देश की ब्रांडिंग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में पुख्ता की जा रही है। दूसरी ओर हकीकत के धरातल पर अभी भी छुआछूत जैसी कुरीतियां जारी हैं। जिला मुख्यालय के नजदीक गिरथान गांव में यज्ञ के भंडारे में पूड़ियों की डलिया छू लेने की वजह से दलितों के साथ अशोभनीय व्यवहार किया गया। सामूहिक रूप से पीड़ित दलितों ने बुधवार को सीओ कार्यालय में इसकी शिकायत दर्ज कराई।
लोकतंत्र और मानवाधिकारों को कलंकित करने वाली सामाजिक कुरीतियां जागरूकता के प्रसार के बावजूद नही मिट पा रही हैं। एट थाने के गिरथान गांव में 8 फरवरी से 16 फरवरी तक आयोजित किये गये धार्मिक महायज्ञ में वैसे तो गांव के दलितों से भी चंदा लिया गया था। जिसकी वजह से वे भंडारे में आमंत्रित किये गये। लेकिन भंडारा परोसने के लिए इसी दौरान एक दलित युवक सत्येंद्र कुमार ने जैसे ही पूड़ियों की डलिया उठाने की कोशिश की बबाल हो गया। यज्ञाचार्य कालीदास पाठक ने दूसरे लोगों को ललकारा कि डलिया छूकर इन्होंने पूरा भंडारा बेकार कर दिया है इनको मारो। इसके बाद दलितों के साथ जातिवादी मानसिकता से ग्रसित लोगों ने गालियां देने से लेकर हर तरह का दुव्र्यवहार किया। यहां तक कि महिलाओं को भी नही बख्सा गया।
इसके बाद दबंगों ने मीटिंग करके दलितों का हुक्का-पानी बंद करने का फैसला सुना डाला। इसमें दलितों के साथ बातचीत करने वालों पर 1000 रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया। दलितों के मुताबिक उनकी बिजली काटने, पानी बंद करने का भी एलान किया गया है। पंचायत ने फैसला किया है कि अगर कोई दलित बच्चा पढ़ने के लिए सरकारी स्कूल में आये तो उसे मारकर भगा दिया जाये। दबंगों के घर के सामने निकलने पर उन्हें अपने जूते हाथ में लेकर गुजरने के लिए मजबूर किया जाये। आतंकित दलितों ने जिला मुख्यालय पर आकर पुलिस उपाधीक्षक डाॅ. जंग बहादुर सिंह यादव को इस जोर जुर्म की लिखित शिकायत की। यह अल्टीमेटम भी दिया कि अगर उन्हें न्याय न मिला तो वे धर्म परिवर्तन कर लेंगे। सीओ डाॅ. जंगबहादुर सिंह यादव ने बाद में कहा कि उन्हें दलितों का प्रार्थना पत्र मिल गया है और उन्होंने जांच शुरू कर दी है। जातिगत भेदभाव व छुआछूत को किसी भी कीमत पर बर्दास्त नही किया जायेगा।





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