22orai01उरई। सिरसा कलार थाने के पिथऊपुर गांव में वृद्ध किसान को भली चंगी हालत में दिल का दौरा पड़ गया जिससे उपचार शुरू होने के पहले ही वह चल बसा। किसान की मौत के लिए गांव के लोग सूखे को जिम्मेदार बता रहे हैं। उनका कहना है कि सूखे की वजह से मृत किसान के खेतों की बुबाई तक नही हो सकी थी। इससे वह कई दिनों से सदमे की हालत में था। लोगों ने मृत किसान के आश्रितों को सहायता दिलाने की मांग जिला प्रशासन से की है।
दिवगंत किसान लालाराम (74वर्ष) तीन लड़कों राकेश सिंह, फूल सिंह और श्याम सिंह के भरे पूरे परिवार के बावजूद घर के मुखिया की कमान खुद ही संभाले हुए थे। पूरे परिवार की जीविका का मुख्य आधार पैतृक खेती थी। जिसकी आमदनी से लालाराम पूरे परिवार का बजट बनाते थे। सूखे के कारण खरीफ की फसल से भी उन्हें हाथ धोना पड़ा। इसके बाद रबी की फसल भी जब वे नही बो पाये तो घर के मुख्य कर्ताधर्ता होने के नाते उन पर चिंता सवार हो गई। शारीरिक रूप से भले ही वे आखिरी तक पूरी तरह हृष्टपुष्ट बने रहे हों लेकिन खेती की बर्बादी की चिंता में वह दिनरात घुलते जा रहे थे। कई दिनों के इस क्रम ने उनकी दिलों की धड़कन को आज सुबह जाम कर दिया जिससे वे चल बसे। घर के मुखिया की मौत से उनका पूरा परिवार चिंघाड़े मारकर रोने लगा। पूरे गांव में इसके कारण मातमी माहौल छा गया।
ग्रामीणों ने बताया कि किसान की मौत की खबर अधिकारियों को दे दी गई थी। लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनके परिवार को सांत्वाना देने के लिए आना गंवारा नही किया। जिलाधिकारी से मांग की गई है कि वे मानवीय आधार पर इस मामले में निजी तौर पर हस्तक्षेप करें और शासन को दिवंगत किसान के आश्रितों को उचित मुआवजा देने के लिए पत्र लिखें।

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