कोंच-उरई। एक ओर पेयजल संकट जिले में तेजी से गहराता जा रहा है, दूसरी ओर सार्वजनिक हैंडपंप हथियाने वालों पर प्रशासन कोई कार्रवाई करने को तैयार नही है। जबकि इस लापरवाही से समस्या और विकराल होने की आशंका जताई जा रही है।
जिले में मानक से अधिक हैंडपंप होते हुए भी इन्हें लगाने की मांग का तांता नही टूट पा रहा। दरअसल सार्वजनिक हैंडपंपों को लोगों ने निजी हद में घेरकर उसका लाभ सारे मोहल्ले के लोगों को उठाने देने में अड़ंगेबाजी लगा रखी है। इसके कारण कितने भी हैंडपंप लगते रहने के बावजूद एक ही मोहल्ले में एक और नया हैंडपंप लगाने की मांग बरकरार रहती है। कस्बे में इसका एक उदाहरण मोहल्ला प्रताप नगर के सार्वजनिक हैंडपंप पर पूर्व सभासद राजू गुप्ता के कब्जे के रूप में देखा जा सकता है।
प्रताप नगर वैसे भी पेयजल प्रभावित मोहल्ला है। उस पर तुर्रा यह है कि इस बार बारिश का सीजन खाली निकल जाने से पूरा जिला सूखे की चपेट में आ गया है जिससे प्रताप नगर भी अछूता नही है। गर्मी बढ़ने के साथ मोहल्ले के लोग पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर उठे हैं लेकिन राजू गुप्ता की सेहत पर इसका कोई असर नही है। प्रशासन भी अपने निष्क्रिय रवैये से उबरने को तैयार नही है। जिसके कारण निजी बन चुके इण्डियन मार्का सार्वजनिक हैंडपंपों के आम उपयोग की गुंजाइश खत्म हो चुकी है। नवागंतुक जिलाधिकारी संदीप कौर से मांग की गई है कि वे प्राथमिकता के आधार पर सार्वजनिक हैंडपंपों को कब्जा मुक्त कराने का अभियान छेड़े। अन्यथा इसके कारण पानी भरने के लिए परेशान लोगों का गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फटने की नौबत आ सकती है।





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