उरई। जिला प्रशासन की ओर से राज्य सरकार को भेजी गई रिपोर्ट पर अगर यकीन करें तो प्राकृतिक आपदा के बीच जनपद में रामराज जैसा सुशासन कायम है। बिजली की आपूर्ति जिला मुख्यालय पर 22 घंटे हो रही है और ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे। स्थापित 11 हजार 339 ट्रांसफार्मरों में केवल 4 खराब हैं। इसी तरह पेयजल के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के 25566 नलकूपों में से सिर्फ 1 हजार 750 स्थाई रूप से खराब हैं और 375 हैंडपंप ऐसे हैं जो कुछ दिन पहले खराब हो गये हैं जिनके जल्द ही दुरुस्त हो जाने की आशा की जा रही है। शहरी क्षेत्र में तो और ज्यादा शाबाशी लायक नजारा है। क्योंकि कस्बों में 2 हजार 934 हैंडपंपों में 188 मात्र स्थाई रूप से ठप्प हैं। जबकि अन्य हैंडपंपों में से किसी की मरम्मत तक की जरूरत नही है। क्या प्रशासन के कागजों में सजी इस गुलाबी तस्वीर की तस्दीक जनता जनार्दन के कोई साहबान करेंगे ? इसके अलावा पेयजल संकट पैदा न होने देने के लिए अपनी पीठ थपथपाते हुए जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को रिपोर्ट में यह भी कहा है कि जनपद में केवल 25 मोहल्ले ऐसे है जहां पेयजल संकट के कारण टैंकरों से आपूर्ति कराई जा रही हैं इनमे दो मोहल्ले नगर क्षेत्रों में और 23 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। स्थाई रूप से खराब हैंडपंपों में 450 रीबोर के लिए चिन्हित किये गये हैं जिनमें से ग्रामीण क्षेत्र के 70 हैंडपंप रीबोर हो चुके हैं। रीबोर के लिए चिन्हित हैंडपंपों हेतु 263.77 लाख रुपये का बजट चाहिए जिसमें फिलहाल 78 लाख 70 हजार रुपये जनपद को मिले थे। तालाबों के मामले में जिला प्रशासन ने माना है कि 1702 तालाबों में 1088 अभी रीते पड़े हैं। जबकि 45 ऐसे गांव है जहां कोई तालाब मौजूद ही नही है। जनपद में 2726 कुओं में 988 केवल ऐसे हैं जिनका इस्तेमाल पेयजल या सिचाई के लिए हो सकता है जबकि कुओं के पुनरुद्धार पर करोड़ों रुपये खर्च किये गये थे इसके बावजूद 1728 कुएं बर्बाद हो चुके हैं। जनपद में भुखमरी से दम तोड़ रहे मवेशियों को बचाने के लिए स्थापित चार पशु राहत शिविरों मे 10418 मवेशियों की परवरिश की गई। रिपोर्ट में पशु पालकों के पास नया भूसा आने की जानकारी देकर राज्य सरकार को इस मामले में किसी तरह की मदद भेजने से परोक्ष में रोक दिया गया है। मनरेगा के मामले में रिपोर्ट में कहा गया है कि 1476 परियोजनाएं इसके तहत संचालित हैं। जिनमें 32434 लोगों को गत् सप्ताह रोजगार दिया गया। फसली वर्ष में खरीफ सीजन 15 जून को बारिश शुरू होने के बाद प्रारंभ माना जाता है लेकिन जिला प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में खरीफ की अग्रिम स्टार्टिंग अभी से कर डाली है। रिपोर्ट में बताया गया है कि खरीफ में 28 सौ लाख हैक्टेयर में मूंग की बुबाई का लक्ष्य निर्धारित था जिसमें से 2840 लाख हैक्टेयर में बुबाई हो चुकी है। (क्षमा करें लाख का गुणित हमने अपने मन से नही जोड़ा यह सरकारी रिपोर्ट का ही अविकल अंश हैं)। अन्य फसलों में 19297 लाख हैक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष 15824 में बुबाई हो चुकी है। क्या जिला प्रशासन ने जायद को खरीफ में मर्ज करने की बाजीगरी अपनी रिपोर्ट में दिखाई है। अगर ऐसा है तो रिपोर्ट तैयार करने वाले को जादू कला का पुरस्कार जरूर दिया जाये।






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