27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce1उरई। भले ही जमीनी स्तर पर ठप्प होती जा रही पेयजल आपूर्ति को बहाल रखने के प्रयास गुम से हो लेकिन जिला प्रशासन इसके लिए जुबानी आदेश की सख्ती में कोई कंजूसी नही दिखा रही। जिलाधिकारी संदीप कौर ने सोमवार को जल निगम के अधिशाषी अभियंता को अपने दफ्तर में तलब करके इस सख्ती की एक और बानगी दिखाई।
उन्होंने जल निगम के अधिशाषी अभियंता से कहा कि अगर कोई परियोजना बंद मिली तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी। दूसरी ओर हालत यह है कि जल निगम की अधिकांश पाइप्ड पेयजल परियोजनाएं भ्रष्टाचार के कारण लाइलाज बीमारी की जकड़ में फंसी हुई हैं। कहीं टंकी लीक होने की वजह से एक सीमा से अधिक दूर तक सप्लाई देना संभव नही हो रहा तो कहीं घटिया पाइप लाइनों के बस्र्ट हो जाने की वजह से एक भी दिन आपूर्ति शुरू नही हो पाई। लेकिन कागजों में पिछले कुछ वर्षों से आपूर्ति का दावा जारी है। पहले भी जल निगम को इस तरह की घुड़कियां मिली लेकिन न तो उसके कानों में जूूं रेंगी न ही जल निगम के किसी अभ्ंिायंता पर कार्रवाई की नौबत आई।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा है कि कंट्रोल रूम में दर्ज कराई जाने वाली शिकायतों के समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई की जाये। उन्हें भी प्रतिदिन बताया जाये कि कितने हैंडपंप ठप्प होने की शिकायत आई और कितने हैंडपंप ठीक कराये गये। जिलाधिकारी के रुख को अभी तक भांप न पाने की वजह से जल निगम और जल संस्थान के अभियंताओं में हल्की सिहरन तो है लेकिन काहिली की आदत उन्हें इतना ज्यादा जकड़ चुकी है कि उनकी जंग लगी कार्यशैली में कोई धार इसके बावजूद सचमुच आ पायेगी। यह उम्मीद फिलहाल तो लोगों में कही से नही है।

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