0 रास्ते से गुजर रहीं डीएम ने रुककर इंजीनियरों की अक्ल की ठिकाने
27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce1उरई। जिले के व्यस्ततम मुख्य मार्गों में से एक उरई-भिंड रोड पर कुकरगांव में पुल के निर्माण को पूरा करने में पीडब्लूडी द्वारा की जा रही लापरवाही से मंगलवार को डीएम का पारा गर्म हो गया। उन्होंने संबंधित अभियंताओं को निर्माण अविलंब पूरा कर जल्द से जल्द इस पर से यातायात सुनिश्चित करने को कहा।
जिला मुख्यालय से 10 किलो मीटर दूर मंलगा नाले पर अंग्रेजों के समय बना लोहिया पुल समय सीमा गुजर जाने के बावजूद यातायात का भरपूर साथ दे रहा था लेकिन ओवरलोड मौरम ट्रकों ने इसकी जीवन लीला पर ग्रहण लगा दिया। इसके चलते दो वर्ष पहले यह पुल जगह-जगह धसक गया। बड़ी अनहोनी की आशंका के चलते प्रशासन को पुल से होकर यातायात बंद कराना पड़ा। कई दिनों तक तो उरई से जालौन जाने के लिए भी कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर वाहनों को लगाना पड़ा। बाद में वैकल्पिक व्यवस्था के लिए नाले पर अस्थाई रपटा बनवाने के लिए बजट मंजूर किया गया। लेकिन इस रास्ते पर मौरम ट्रकों का आवागमन रोकने के आदेश कागजों में ही बने रहे। मौरम ट्रक बदस्तूर चलने से रपटा भी कई बार टूटा और बना। अभी भी रपटे से वाहनों का सुविधापूर्ण आवागमन संभव नही हो पा रहा है।
इसी बीच मलंगा के नये पुल के निर्माण की स्वीकृति राज्य सरकार ने कर दी थी। लोक निर्माण विभाग ने कागजों पर तो इसके लिए युद्ध स्तर पर काम किया लेकिन हकीकत के धरातल पर काम खरामा-खरामा चलाया गया। जिससे यह पुल अभी तक पूरा नही हो सका है। इस पर डामरीकरण बांकी है। अगर लोक निर्माण विभाग के अभियंता इच्छा शक्ति दिखाये ंतो कुछ हफ्तों में पुल कम्पलीट हो सकता है। लेकिन उन्हें इसकी परवाह नही है। आज महिया प्रतापपुरा में चैपाल कार्यक्रम के लिए जाते समय डीएम संदीप कौर जब कुकरगांव के रपटे से गुजरी तो उन्हें निर्माणाधीन पुल की याद आ गई। उन्होंने गाड़ी रुकवाकर पुल का अचानक निरीक्षण कर डाला। मामूली कार्य बकाया रह जाने के बावजूद हफ्तों लगते देख डीएम का मूड उखड़ गया। उन्होंने चेतावनी के लहजे में वहीं लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को तलब कर निर्देशित किया कि यह पुल जल्द से जल्द कम्पलीट हो जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि आप लोगों की मंशा अगर बरसात तक पुल के कार्य को बिलंबित रखने की है तो यह मंशा पूरी नही होने दी जायेगी। घोटाले के लिए पुल का निर्माण समय पर कम्पलीट न होने देना घोर आपत्तिजनक है। उन्होंने इसे संज्ञान में लिया है और कार्यप्रणाली में सुधार न दिखा तो कार्रवाई करेंगी।

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