गोहन-उरई। क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता ही जा रहा है। जबकि प्रशासन हैंडपंप ठीक कराने के नाम पर गाल बजाने से आगे नही बढ़ पा रहा है। इसके कारण मई के आखिरी तक बेहाल क्षेत्रीय जनता का हाहाकार चरम पर पहुंच जाने की आशंका है।
ग्राम गोरा भूपका में राजू उपाध्याय के दरवाजे पर लगा हैंडपंप दो हफ्तों से ठप्प है। जिससे उनके आसपास के बाशिंदों को पानी भरने के लिए काफी मशक्कत उठानी पड़ रही है। लेकिन ब्लाॅक स्टाॅफ और कर्मचारी कानों में तेल डाले बैठे हैं। उधर 1800 की आबादी वाले भाऊपुरा कुंडउ में 32 हैंडपंपों में से अरविंद, माखन और संतोष के दरवाजों के हैंडपंप ठप्प पड़े हैं। जिससे गांव में पानी को लेकर मारामारी बढ़ गई है। लेकिन इन्हें ठीक कराने के नाम पर भी ब्लाॅक प्रशासन और ग्राम पंचायत निष्क्रिय है।
पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए कुंओं के पुनरूद्धार को लेकर इस वर्ष भी संजीदगी नदारत है जबकि वर्तमान वर्ष में पानी की जबर्दस्त किल्लत मची हुई है। ग्राम जमरेही सानी में समाजसेवियों ने काफी समय से बंद पड़े कुओं को रस्सी बाल्टी डालकर चालू किया। लेकिन उनकी देखा देखी भी पंचायतें और ब्लाॅक प्रशासन कुछ करेगा इसकी उम्मीद कम ही है।






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