अखिलेश कुमार सिंह
cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। स्वाॅट टीम ने लैपटाॅप से 100 रुपये के नकली नोट बनाने की कंपनी पकड़ने का दावा किया है। यह पहली बार है जब लैपटाॅप के नकली नोट बाजार में खपाये जाने का मामला सामने लाया गया है। हालांकि इस मूर्खतापूर्ण दावे पर पुलिस अधिकारियों के अलावा कोई और यकीन करने को तैयार नही हो रहा।
नोटों की प्रिटिंग इतने विलक्षण तरीके से की जाती है कि उसकी डुप्लीकेसी करना अच्छे-अच्छे हुनरमंदों के बूते की बात नही है। जाली करेंसी छापने वाले लोगों को सटीक मशीनें जुटानी पड़ती हैं जिन्हें हासिल करना आसान नही होता। लेकिन गुडवर्क दिखाने के लिए स्वाॅट टीम ने शेखचिल्लीपन की इंतहा कर दी। सीओ सिटी ने बताया कि नया रामनगर स्थित एक मकान में कई दिन से लैपटाॅप पर नकली नोट की डिजाइन बनाकर प्रिंटर से उनकी काॅपी निकालकर उन्हें बाजार में खपाया जा रहा था। नोट छापने वाले शातिर दिमागों में मुनाफे के बटवारे को लेकर मनमुटाव हो गया। जिससे प्रमोद नाम के एक साझेदार ने पुलिस के सामने इस जालसाजी को आउट कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने 100-100 के नोटो के 92 प्रिंट, लैपटाॅप, प्रिंटर व चाकू के साथ जितेंद्र कुमार कुशवाहा निवासी नया रामनगर रेलवे क्रासिंग के पास और ऋषि मिश्रा श्यामबाबा आश्रम के पास को गिरफ्तार कर लिया। सीओ जंगबहादुर सिंह यादव ने इस गुडवर्क के लिए स्वाॅट टीम की पीठ थपथपाई। दूसरी ओर लैपटाॅप से बने नोट चल जाने के दावे पर शहर के नौजवान गली चैराहों पर पुलिस की खिल्लियां उड़ा रहे हैं।

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