
न बिजली ही है और न हैंडपंप पानी दे रहे हैं, खराब हैं तेरह हैंडपंप
कोंच-उरई। एक तरफ समूचा बुंदेलखंड पानी के गंभीर संकट से जूझ रहा है और सरकार की प्राथमिकता हर हाल में पानी की व्यवस्था बनाये रखने की है जिसके लिये सभी विभागों को ताकीद की गई है लेकिन दूसरी तरफ साल भर पहले अपने आशियाने पा चुके कांशीराम कॉलोनी के गरीब बाशिंदों की हालत आजकल देखने लायक है। इलाके में न बिजली है और न ही पानी की व्यवस्था ही सही है। कॉलोनी में स्थापित ढाई दर्जन हैंडपंपों में तेरह हैंडपंप दम तोड़ चुके हैं। कई बार जल निगम के अधिकारियों के संज्ञान में डालने के बाद भी इन्हें सुधारने की सुध नहीं ली गई है। बिजली जोडऩे की कवायद विभागीय अभियंता पिछले एक हफ्ते से करने में लगे हैं लेकिन अभी फिलहाल उन्हें सफलता नहीं मिल सकी है।
आज मीडिया टीम ने गरीबों की बस्ती कांशीराम कॉलोनी का जायजा लिया तो वहां हालात काफी बदतर दिखे। मूलभूत समस्याओं का वहां भारी टोटा दिखा। माडिया के लोगों को देखकर आशा भरी नजरें लेकर पहुंची महिलाओं ने अपना दर्द बयां करते हुये कहा कि उनके छोटे छोटे बच्चे हैं और बिजली नहीं होने के कारण मच्छरों के प्रकोप से वे बीमार हो रहे हैं। बिना बिजली के कैसे जिंदगी जी जा सकती है इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। सुनीता, मिथलेश अहिरवार और बन्नो बताते हैं कि उन्हें साल भर पहले आवास आवंटित किये गये थे तब अधिकारियों ने भरोसा दिया था कि एकाध महीने में ही बिजली पानी की समुचित व्यवस्था करा दी जायेगी, लेकिन पूरा बर्ष गुजर गया, अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली। कॉलोनी में ढाई दर्जन हैंडपंप स्थापित हैं लेकिन तेरह हैंडपंपों ने पानी देने से महीनों पहले इंकार कर दिया है। जल निगम के अधिकारी आज कल आज कल करके टरकाने में लगे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यहां न जाने कहां कहां के अराजक तत्व भी आकर यहां की शांति व्यवस्था में खलल डालने का काम करते हैं। स्कूल नहीं होने से बच्चों का भबिष्य खराब हो रहा है।
कॉलोनी के निवासी विकलांग विजय तिवारी ने बताया है कि जल निगम के अभियंता से कई बार हैंडपंपों को सुधारने के लिये कहा गया और अधिकारी आज भोर आज भोर करके टरकाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बिजली की अनुपलब्धता भी यहां बड़ी समस्या है।
कॉलोनी के एक और अभावग्रस्त व्यक्ति अमरचंद बताते हैं कि हैंडपंपों में पाइप कम डालने की बजह से अधिकांश हैंडपंप दम तोड़ चुके हैं। उन्हों यह भी बताया कि बिजली विभाग के अधिकारी यहां की बिजली जोडऩे की बात हफ्ते भर से कह रहे हैं लेकिन अभी तक जोड़ी नहीं जा सकी है।
बृद्घा लक्ष्मी देवी का अपना अलग ही दर्द है, उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत इस बात की है कि न तो यहां राशन कार्ड बनाये जा रहे हैं और न ही कॉलोनी के लोगों को वोटर बनाया गया है जिससे उनके सामने अपनी पहचान बताने की भी बड़ी समस्या है।
गृहिणी संगीता कहती है कि यहां स्कूल नहीं होने की बजह से उसके बच्चे पढ नहीं पा रहे हैं। बिजली यहां की सबसे बड़ी समस्या है जिसके कारण इस भीषण गर्मी में जहां बच्चों की हालत खराब है वहीं मच्छरों से लड़ाई लडऩी पड़ रही है।







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