उरई। आशा संगिनियों के साथ बैठक में जिलाधिकारी संदीप कौर ने सीएमओ और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों की तबियत झक्क कर दी। उनकी कार्यशैली के नमूनों पर जिलाधिकारी ने उन्हें इतनी बार जलील किया कि वे शर्म से पानी-पानी हो गये। यह दूसरी बात है कि इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की मोटी चमड़ी वाले अधिकारी अपने क्रिया कलापों में कोई सुधार कर पायेंगे इसे लेकर संदेह का निराकरण संभव नही है।
जिलाधिकारी ने महिला अस्पताल और जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रात में रहने वाली अव्यवस्थाओं पर करारी चोट की। उन्होंने सीएमओ डाॅ. अजीत कुमार जायसवाल से कहा कि यह आपकी व्यक्गित जिम्मेदारी है कि रात 12 बजे के बाद महिला और जिला अस्पताल में एक-एक एमबीबीएस डाॅक्टर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि वे खुद भी औचक निरीक्षण कर इस बात को जांचती रहेंगी कि आप उनके इस निर्देश का कितना पालन कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने सीएमओ से पोषण पुनर्वास केंद्र, ट्रामा सेंटर व जिला अस्पताल की इमरजेंसी का हर रोज निरीक्षण करने को कहा। डीएम ने कहा कि इनकी व्यवस्थायें दुरुस्त रहनी चाहिए जिससे इलाज में कमी के कारण किसी को बेमौत जान न गंवानी पड़े। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी रात में एक काॅल पर डाॅक्टर के हाजिर होने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैठक में जिलाधिकारी ने आशा संगिनियों की क्लास लगाई। उन्होंने आशा संगिनियों से पूंछा कि एनआरसी क्या होता है लेकिन कोई आशा संगिनी एकदम जबाव नही दे पाई। काफी देर बाद एक आशा संगिनी ने बताया कि एनआरसी पोषण पुनर्वास केंद्र का संक्षिप्त नाम है। डीएम इससे नाराज हो गईं। उन्होंने सीएमओ से कहा कि आप इनके प्रधानाचार्य हैं इनकों क्या ट्रेनिंग देते हैं। आप तो इन्हें बेसिक बातें तक नही बता सके। उन्होंने सीएमओ से कहा कि आप आशा संगिनियों को पूरी तरह एक्टीवेट करें। अगर ऐसा नही होता तो वे आशा संगिनियों पर नही आप पर कार्रवाई करेंगी।
डीएम ने नई पोलियो वैक्सीन के बारे में पूंछतांछ की तो फिर वही आलम रहा। नई वैक्सीन के बारे में स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ता जानकारी नही दे पाये। डीएम ने कहा कि यह तो माथा पीटने लायक स्थिति है। इसे बर्दास्त नही किया जायेगा।







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