जालौन-उरई। रेल लाओ आंदोलन ने जालौन में नया इतिहास रच दिया। आंदोलन को रिकार्ड समय तक खीचने की क्षमता प्रदर्शित करने की वजह से इसके सूत्रधार गौरीश द्विवेदी जालौन की उभरती हुई बड़ी राजनीतिक शख्सियत के रूप में अपने को स्थापित करने मे सफल रहे हैं। अनशन के 56वें दिन नाटकीय घटनाक्रम के तहत राज्य सरकार के निर्देश के कारण जिलाधिकारी संदीप कौर पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार के साथ अनशन स्थल पर मंडल रेल प्रबंधक के प्रतिनिधि को लेकर पहुंचीं और उन्होंने उपस्थित जन समुदाय को आश्वासन दिया कि उनकी मांग के संबंध में वे केंद्र सरकार को जोरदार चिटठी लिखेंगी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से उनकी मांग पूरी कराने के लिए पैरवी करने में कोई कसर नही छोड़ी जायेगी।
ऐसे समय जबकि समय की कमी के कारण एक दिन के सांकेतिक आंदोलन की आयोजना तक मुश्किल हो रही है। यहां के रेल लाओ आंदोलन के लगभग दो माह तक चलते रहने के बावजूद अनशन के लिए जुटने वालों का तांता खत्म न होने से जिले से लेकर दिल्ली तक के जानकार चैंके बिना नही रहे। 2014 की मोदी लहर में बिना वोट मांगे भारी बहुमत से जीते सांसद भानुप्रताप वर्मा अपनी लोकप्रियता के गुमान में यह सोच बैठे थे कि अनशन के लिए आंदोलन के सूत्रधारों को एक-दो दिन बाद कोई आदमी नही मिलेगा। उनका गुरूर टूट गया जब भाजपा के लोग तक अपना अस्तित्व बचाने के लिए आंदोलन के मंच पर जुटने को मजबूर हो गये। इसके बाद भानु वर्मा ने भारी कोशिश की कि उनके आश्वासन पर आंदोलनकारी अनशन धरना समाप्त करने की सहमति प्रदान कर दें लेकिन तब तक उनके खिलाफ सभी वर्गों का गुस्सा इतना प्रचंड हो चुका था कि जो उनकी हिमायत के लिए पहुंचा उसे खदेड़ दिया गया।
इस बीच प्रशासन भी उदासीन रहा। जिसकी वजह से आंदोलन की इतनी लंबी मियाद के बावजूद जिम्मेदारों की कोई प्रतिक्रिया सामने न आने से खींझकर आमरण अनशन का फैसला कर लिया गया। जिसमें मनसफ खान और असलम सिददीकी जैसे बुजुर्ग व प्रद्युम्न दीक्षित और इमरान अंसारी जैसे नौजवान सिरफरोशी की तमन्ना के अंदाज में तीन दिन तक मोर्चे पर डटे रहे। अभिसूचना दस्तों ने मामले की नजाकत को समझते हुए अपनी रिपोर्ट में शासन को आगाह किया कि प्रचंड गर्मी की वजह से आमरण अनशनकारियों के साथ कोई भी अनहोनी हो सकती है और अगर किसी अनशनकारी की हालत बिगड़ी तो जिले में स्थितियां विस्फोटक हो जायेंगी। इसके बाद लखनऊ की सरकार हरकत में आ गई। डीएम को उदासीनता छोड़कर अनशन समाप्त कराने के लिए तुरंत मौके पर जाने का फरमान सुना दिया गया। इसके अनुपालन में रेलवे मंडल झांसी के मुख्य अभियंता मनोज कुमार के साथ पहुंची डीएम ने मंच पर चढ़कर लोगों को संबोधित किया। उन्होंनें कहा कि वे लोगों की सुलगती भावनाओं की जानकारी पत्र के माध्यम् से रेल मंत्रालय को भेजेंगी। मुख्य अभियंता ने बताया कि जालौन से होकर गुजरने वाली रेल लाइन के लिए रेल मंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी है। निश्चित तौर पर अगले बजट में इस रेल लाइन की स्वीकृति मिल जायेगी।
उधर धरना स्थल पर फजीहत के डर से न पहुंचने वाले सांसद भानुप्रताप वर्मा ने आमरण अनशन के पटाक्षेप के दो दिन पहले लोकसभा में जालौन में रेलवे लाइन के लिए आंसू बहाए तांकि डैमेंज कंट्रोल हो सके। यह काम अगर वे शुरू में ही कर लेते तो शायद आंदोलन इतने लंबे समय तक न चलता। जिससे विधानसभा चुनाव के पहले जिले में भारतीय जनता पार्टी का माहौल चैपट हो गया है। आंदोलन का संयोजन करने में जबर्दस्त सूझबूझ का परिचय देकर गौरीश द्विवेदी ने नवोदित हालत में ही कस्बे की राजनीति में अपना कद काफी ऊंचा बना लिया है। यह भी आंदोलन के पटाक्षेप की चर्चाओं के बीच एक विषय बना हुआ है।






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