cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। ग्राम पंचायतों को निर्बल वर्ग के उत्थान और विकास कार्यों के मामले में व्यापक दृष्टिकोण के साथ काम करने की भावना अपनानी होगी तभी देश में गुणवत्तापूर्ण लोकतंत्र की स्थापना संभव है।
यह बात कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के अध्यक्ष लाल सिंह चैहान ने महेवा विकास खंड के ग्राम सरसई में आयोजित जन चेतना मंच की सभा को संबोधित करते हुए कही। सभा की अध्यक्षता कन्हई सिंह गुर्जर और संचालन डाॅ. रामकिशोर गुप्ता ने किया।
लाल सिंह चैहान ने कहा कि लोकतंत्र के नाम पर देश में लूटतंत्र कायम है। स्थिति में सुधार के लिए ऊपर की ओर मुंह तांकने की बजाय धरातल से पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि गांव देहात में अभी भी लोग सिद्धांतों से बंधे हुए हैं। उनकी नैतिकता को झकझोरकर ग्राम पंचायतों को आदर्श लोकतंत्र का रोल माॅडल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों का अनुकरण करने के लिए शीर्ष स्तर की संस्थायें स्वतः बाध्य होंगी। इस अवसर पर काॅ. गिरेन्द्र सिंह कुशवाह ने कहा कि लोगों के चारित्रिक उत्थान के लिए जुआ और शराब की लत के खिलाफ मुहिम चलाने की जरूरत है। हरीशंकर याज्ञिक ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य नही मिल पा रहा, जब तक किसान बदहाल रहेंगे तब तक यह देश कभी खुशहाल और सुखी नही हो सकता।
वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र बाबू मिश्रा ने कहा कि स्व. राजीव गांधी ने ग्राम पंचायतों को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार देकर जिस संवैधानिक क्रांति का सूत्रपात किया उसकी देन है कि आज विकास का रथ पगडंडियों तक चल पड़ा है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को अपनी अहम् जिम्मेदारी का अनुभव करते हुए विकास और जनकल्याण के मामले में समग्र दृष्टिकोण के तहत काम करना चाहिए तभी वे अपनी भूमिका और ऐतिहासिक जिम्मेदारी के साथ न्याय कर पायेंगे। सभा में महेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह गुर्जर, ओम नारायण शर्मा जालौन, सुरेंद्र सिंह आदि ने भी विचार प्रकट किये।

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