cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। लापरवाही के चलते प्राथमिक शिक्षा को पलीता लग रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के औचक निरीक्षण में यह बात खुलकर सामने आ गयी। बीएसए को निरीक्षण में कई स्कूल बंद मिले तो कई में एक भी बच्चा नहीं था। इसको घोर लापरवाही मानते हुए बीएसए राजेश कुमार वर्मा ने 15 अध्यापकों का वेतन रोक दिया साथ ही संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया है।
प्राथमिक शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है, सब पढ़ें सब बढ़ें यह स्लोगन तो स्कूल की दीवारों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक की दीवारों और होर्डिंग में लिखे मिल जाते हैं लेकिन धरातल पर यह खोखले ही साबित हो रहे हैं। प्राथमिक शिक्षा की हकीकत कुछ और ही है। लापरवाही के चलते प्राथमिक शिक्षा धड़ाम होती जा रही है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निरीक्षण में यह पोल खुलकर सामने आ गयी। बीएसए स्कूलों का औचक निरीक्षण करने पहुंचे तो वह भी लापरवाही देखकर दंग रह गये। प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर बंद मिला, उच्च प्राथमिक विद्यालय ऊमरी खुर्द में ताला लटक रहा था, प्राथमिक विद्यालय उमरी खुर्द भी बंद था। प्राथमिक विद्यालय चैथ खुला मिला लेकिन एक भी बच्चा नहीं था, उच्च प्राथमिक विद्यालय चैथ में सहायक अध्यापक अनुपस्थित थे जबकि छात्र संख्या शून्य थी। प्राथमिक विद्यालय भराना का भी यही हाल रहा, प्राथमिक विद्यालय किरवाहा में भी छात्र संख्या निल थी। प्राथमिक विद्यालय जमलापुर बंद मिला, प्राथमिक विद्यालय भोजापुर में सहायक अध्यापक नदारद थे जबकि स्कूल में पंजीकृत बच्चों के सापेक्ष एक भी बच्चा नहीं था। अब्दुल्लापुर में सहायक अध्यापक गायब थे और छात्र संख्या निल मिली, प्राथमिक विद्यालय इस्लामपुर, कन्या प्राथमिक विद्यालय कुरसेड़ा, उच्च प्राथमिक विद्यालय कुरसेड़ा में छात्र नहीं पाये गये। इसको घोर लापरवाही मानते हुए बीएसए ने 15 अध्यापकों का वेतन रोक दिया। साथ ही संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को स्पष्टीकरण नोटिस दिया गया है।

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