0 संकटा माता मंदिर के दर्शन उसी का एक हिस्सा
images-1उरई। भाजपा यदि दलित जातियों की ओर मुड़ी तो कांग्रेस ने अब हिंदू आस्था से अपनी दूरी मिटाने का प्रयास शुरू कर दिया है। राहुल गांधी ने बदली राजनीति की शुरूआत अयोध्या से कर चित्रकूट तक जारी रखी। वे जब उरई आयेंगे तब संकटा माता के दर्शन कर भाजपा को जबाव देना चाहेंगे कि कांग्रेस को किसी सांचे में ढालने की कोशिश न की जाये।
हिंदू आस्था का पूरा बोझ फिलहाल भाजपा अभी तक लादे घूम रही थी। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद इस तस्वीर से बाहर निकलने की कोशिश शुरू कर दी गई। धम्म यात्राएं इसका उदाहरण हैं। उज्जैन कुंभ के दौरान संघ पदाधिकारियों के साथ दलितों को भोजन कराने का खास आयोजन किया गया था। कहते हैं कि राजनीति का स्वार्थ पूर्ति ही मुख्य सिद्धांत होता है। राजनीति में सफलता की आवश्यकता समझ कांग्रेस युवराज राहुल गांधी अब हिंदुत्ववादी विचारधारा से निकटता बढ़ाने को इस ओर चल दिये हैं। संभवतः ऐसा पीके टीम के सुझावों के बाद किया जा रहा है। भाजपा को उसी के सूत्र से जबाव देने के लिए राहुल ने जब अपने यूपी अभियान की शुरूआत की तो वह अयोध्या में भगवान का आशीर्वाद मांगने पहुंचे।
चित्रकूट भगवान राम की तपो स्थली है। यहां उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के दर्शन कर बाद में कामतानाथ के सामने मत्था टेका। कांग्रेस को नई संजीवनी दिलाने की व्यवसायिक कोशिश में जुटे प्रशांत किशोर गोस्वामी लोगों से दावा कर रहे हैं कि दो माह बाद हर किसी की जुबान पर कांग्रेस का नाम होगा। उनके इस धार्मिक फार्मूले को राहुल इसलिए भी अपना रहे हैं जिससे कि भाजपा अब यह न कहने पाये कि राहुल सिर्फ मुसलिमों या दलितों के घर जाते हैं और हिंदू धार्मिक स्थानों से जानबूझ कर दूरी रखते हैं।
लिहाजा सर्व धर्म समभाव की नीयत लेकर आगे बढे राहुल गांधी उरई में पदमशाह बाबा की मजार पर चादर चढ़ायेंगे। डाॅ. अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण करेंगे। फिर वह संकटा माता के मंदिर में जाकर देवी जी के विशेष पूजन में हिस्सा लेंगे। राहुल यहां अभी तक जब-जब आये ऐसा कुछ नही किया। 2006 से 2009 तक उन्होंने बुंदेलखंड में गरीबों आदिवासियों को जोड़ने के लिए महाअभियान चलाया था। लेकिन मंदिर आस्था से अपने को दूर रखा था। इस बार के चुनाव में वह नई रणनीति से भाजपा का मुकाबला करना चाहते हैं। जिससे कि ध्रवीकरण का लाभ भाजपा न उठाने पाये।

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