(डाॅ. राकेश द्विवेदी)
उरई। बुंदेलखंड का बड़ा पुराना खानपान है हलवा और माड़े। खास लोगों के लिए खास डिस। स्वागत की यह परंपरा मंहगी और कठिन जरूर है पर अभी भी यह प्रयोग से बाहर नही हुई है। राहुल गांधी को पहले भोजन में इसे परोसने का मन बनाया गया था लेकिन एसपीजी व टीम पीके की उलझनों से हाथ पीछे खींच लिये गये। ऐसा कम ही होता है कि बुंदेलखंडवासी अपने खास मेहमान का स्वागत घर पर बनाये गये भोजन से न करें।
राहुल गांधी अब वही खायेंगे जो उन्हें जिला प्रशासन अथवा पीके टीम परोसेगी
स्थानीय नेताओं के मन में इसकी टीस जरूर है किंतु वे मजबूर हैं। उन लोगों को कुछ भी नही बताया जा रहा है कि खाट कहां से आयेगी या राहुल क्या खाना पसंद करेंगे। कांग्रेस के पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी ठेठ लुधियांत क्षेत्र से हैं। हलवा और माड़़े अभी भी लुधियांत की खास खाद्य सामग्री है। इसमें शुद्ध घी का भरपूर इस्तेमाल होता है। एक वक्त था जब शादी समारोह में इसका खास स्थान होता था। यदि हलवा, माड़े न मिले तो कुछ भी खिला दिया गया हो स्वागत फीका माना जाता था। श्री चतुर्वेदी कहते हैं कि- मेरी भी इच्छा हुई थी कि राहुल गांधी पहली बार उरई रुकेंगे तो क्यों न उनकी तबियत से बुंदली अंदाज में खातिरदारी करें। उन्हें बयारू (डिनर) तथा कलेऊ (ब्रेकफास्ट) कराया जाये। खासतौर पर हलवा माड़े और सुबह देशी घी के आलू पराठे तथा कुरकुरी जलेबियां उसमें शामिल हों। उन्होंने अब इसलिए इरादा छोड़ दिया क्योंकि एसपीजी की बंदिशें बहुत हैं। उसकी टोका-टाकी से कुछ भी मन के साथ नही परोसा जा सकता है। फिर टीम पीके की अपनी व्यवस्थायें हैं। राहुल के कार्यक्रम की व्यवस्था संभालने को उन्हें बुंदेलखंड में अलग-अलग टीमें घूम रही हैं। यहां भी जो टीम व्यवस्था देख रही है उसका स्थानीय लोगों से कोई तालमेल नही है। कोंच और कालपी में चैपाल के लिए खाटें कहां से आयेगी कोई नेता नही बता पा रहा है। इतना जरूर पता चला है कि कोंच के मथुरा प्रसाद महाविद्यालय में 1500 खाटें बिछाई जानी है। पूर्व विधायक को विश्वास है कि दूसरी जगहों की तरह जालौन जनपद में खाटों की लूट नही होगी। यहां का आदमी गरीब भले हो लेकिन स्वाभिमानी है। यदि हम लोग चाहेगें तभी किसान भले ही खाट उठा ले जायें। ऐसे किसानों से संपर्क किया जा रहा है जो राहुल के सामने बैठकर उनकी सुनें और अपनी सुना सकें।






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