(डाॅ. राकेश द्विवेदी)
0 डिस्कवरी चैनल ने सड़क पर दिखाई थी डाॅक्यूमेंट्री
cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। कदौरा की जिस सड़क को राहुल गांधी ने डिस्कवरी चैनल तक पहुंचाकर सबसे खराब सड़कों में शुमार किया था। आज वे उसी सड़क से भर्राटा भरते हुए आये। इस बार उनका पेट नही दुखा। आराम से सरपट भागते हुए कालपी तक पहुंच गये।
युवक कांग्रेस के कार्यक्रम में राहुल गांधी इससे पहले वर्ष 2010 में आये थे। हमीरपुर में कार्यक्रम को संबोधित कर वह सड़क के रास्ते ही उरई की ओर चल दिये। राहुल को यह बिल्कुल पता नही था कि हमीरपुर से जोल्हूपुर तक यह सड़क के नाम पर गडढा है। तब वह जोल्हूपुर कैसे आ पाये थे राहुल का ही दिल जानता है। 3-4 फीट तक अनवरत् जारी गडढों में जब उनकी कार कूदती तो उनकी हालत खराब हो जाती। पूरे रास्ते उछलते-कूंदते रहे। एक घंटे की जगह करीब तीन घंटे लगे। उरई आकर अपने नेताओं से सबसे पहले उन्होंने जोल्हूपुर-हमीरपुर मार्ग की ही चर्चा कर बेहद अफसोस जताया था। यहां से लौटने के बाद राहुल ने मीडिया से चर्चा की थी। सड़क की हालत सुधरवाने को उन्होंने एक नया रास्ता अपनाया। डिस्कवरी चैनल से सहयोग मांगा गया। डिस्कवरी ने डाॅक्यूमेंट्री बनाकर इस मार्ग को विश्व के सबसे खराब मार्गों में एक बताया। इस डाॅक्यूमेंट्री की खूब चर्चा हुई। तब सूबे में मायावती मुख्यमंत्री थीं। इसके बाद अखिलेश यादव करीब साढ़े तीन वर्ष तक जब मुख्यमंत्री रह चुके तब कहीं जाकर इस मार्ग का कायाकल्प हुआ। तब की सड़क और अब की सड़क में जादुई अंतर हो गया है। बिल्कुल सपाट और चिकनी। दो लेन आने की और दो लेन जाने की। लगभग ढाई दशक तक यहां के लोगों ने बड़ी मुसीबतें उठाईं।
राहुल गांधी आज जब इस मार्ग से गुजरे तो उन्हें वही सन् 2010 का दृश्य आ गया। पूरे रास्ते जब उन्हें कही कोई झटका नही लगा तो उन्होंने राहत की सांस ली। अच्छी स्पीड के साथ जब बिना किसी परेशानी का सफर पूरा हुआ तो वे मुस्कराहट के साथ जोल्हूपुर मोड़ पर गाड़ी से उतरे जहां बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता फूलों के हार के साथ उनका इंतजार कर रहे थे।

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