21orai03उरई। जिला अस्पताल में हड़ताल के कारण इलाज न हो पाने से परेशान मरीजों ने बुधवार को डाॅक्टरों के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिये जिससे डाॅक्टर हड़बड़ा गये। हालांकि पीएमएस के एक पदाधिकारी ने कहा कि मरीज सरकार से बात करें। सरकार अगर उनकी मांग पूरी नही करेगी तो वे किसी का इलाज नही करेंगे चाहे कोई मरे या जिंदा रहे।
डाॅक्टरों की हड़ताल की वजह से अस्पतालों में भर्ती मरीजों की जान पर बनी रही। लेकिन डाॅक्टरों की संगदिली का यह आलम रहा कि वे कितने भी संगीन मरीज के लिए पसीजने को तैयार नही थे। इस कारण आज मरीजों और उनके तीमारदारों का धैर्य टूट गया। उन्होंने डाॅक्टरों के खिलाफ नारेबाजी शुरू करके उन्हें बैकफुट पर पहुंचा दिया। मरीजों का यह रवैया दूरगामी तौर पर डाॅक्टरों के लिए एक सबक भी है। डाॅक्टर अन्य ट्रेड यूनियनों की तरह अपने वेतन व सुविधाओं के लिए आंदोलन के नाम पर हठधर्मिता दिखाने को स्वतंत्र नही हैं। लेकिन इसके बावजूद वे हड़ताल में मरीजों की जिंदगी के साथ खेलने से नही चूंकते। मरीजों की आज की प्रतिक्रिया का मैसेज साफ है कि भविष्य में अगर डाॅक्टरों ने हृदयहीनता दिखाई तो उन्हें गंभीर खामियाजा भी भोगना पड़ सकता है।
आक्रोशित मरीजों और उनके तीमारदारों ने नारेबाजी के समय मीडिया के साथ बात करते हुए कहा कि सरकार को इनके सामने झुकने की जरूरत नही होनी चाहिए। इन्हें कितना भी वेतन और सुविधाएं दी जायें इन्हें अस्पताल की बजाय घर पर फीस लेकर मरीज को देखना ही है। सरकार ने जिन जांचों को फ्री कर रखा है उनका पैसा भी वे मरीजों से वसूलते हैं। किसी बड़े उद्योगपति से भी ज्यादा कमाई डाॅक्टरों को हो रही है। फिर भी वे सामाजिक जिम्मेदारी उठाने को तैयार नही हैं। इनके आगे सरेंडर करके अगर सरकार ने इनका गलत मनोबल बढ़ाया तो सरकार को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।

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