कोंच-उरई। फार्मासिस्टों व नर्सों सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का बुरा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। डॉक्टरों के ओपीडी करने के बाबजूद भी न तो दवायें मिल रहीं हैं और न ही जांच बगैरह के काम, सो मरीजों की हालत खराब है और वे प्राइवेट अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं।
यूपी में बैसे भी स्वास्थ्य सेवायें पहले से ही धड़ाम थीं, ऊपर से स्वास्थ्य कर्मियों के हड़ताल पर जाने के बाद स्थिति कोढ में खाज बाली हो गई है। नगर के अलावा ग्रामीण अंचलों में आजकल चिकुनगुनिया, डेंगू और वायरल फीवर चरम पर है। इन बीमारियों से निपटने के लिये सरकारी तंत्र गिगियाने की स्थिति में है जिसके चलते ये बीमारियां तेजी से अपने पांव फैलाने में लगी हैं। आज मीडिया टीम ने सीएचसी का जायजा लिया तो वहां पर्चा काउंटर से बाकायदा पर्चे बनाये जा रहे थे और औपचारिकतायें निभाने के लिये डॉक्टर भी ओपीडी में मरीज देख रहे थे लेकिन दवा वितरण कक्ष और पैथोलॉजी बंद होने के कारण मरीज खुद को ठगा सा महसूस कर रहे थे। इस स्थिति को लेकर डाक्टरों का भी जबाब हास्यास्पद ही है कि मरीज तो देखे जा रहे हैं लेकिन दवायें नहीं हैं। इस स्थिति को लेकर वहां मौजूद एक महिला सभासद चुन्नी बेगम अपने बच्चे को दिखाने आई थीं, दवायें नहीं मिलने के कारण उनका गुस्सा देखने लायक था, उनका कहना था कि मरीज मर रहे हैं और इन लोगों को अपनी तनख्वाह बढवाने की पड़ी है। उन्होंने तो सरकार से इन हड़तालियों की बर्खास्तगी तक की मांग कर डाली। ऑफ दि रिकॉर्ड एक बात जरूर अच्छी है कि मरीजों की मिन्नतों पर डॉक्टर बाहर की दवा भी सुझा कर मरीजों के स्वास्थ्य संबर्द्धन में इजाफा कर रहे थे।






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