cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष को रोकने और शांति की संस्कृति विकसित करने के लिए 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र का जन्म हुआ एवं द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जो हिंसा एवं भारतीय क्षति केकारण संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 21 सितंबर 1982 से अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस विभिन्न देशों में सरकारी एवं गैरसरकारी संस्थाओं के द्वारा मनाया जाता है क्योंकि वर्चस्व की जंग के बीच हमें अमन एवं शांति का रास्ता तलाशना होगा। यह बात दयानंद वैदिक महाविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर राजनीतिक चिंतक डा. राजेंद्र पुरवार ने कही।
उन्होंने कहा कि हम सभी को मानवीय समाधान सोचना होगा। शांति जीवन को जीने योग्य बनाती है। यूनीवर्सल पीस फेडरेशन के प्रदेश संयोजक डा. प्रवीण सिंह जादौन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्रसंघ ने 2030 तक सतत विकास के लक्ष्य तय किए हैं जिसमें गरीबी प्राकृतिक संसाधनों का अतिक्रमण पानी की कमी सामाजिक असमानता पर्यावरण शांति के सम्मुख चुनौतियां हैं। शताब्दी महाविद्यालय के प्राचार्य डा. अनुज भदौरिया ने कहा कि आज का दिन हमें वह चीज प्राप्त करने की प्रेरणा देता है जिसकी हमें सख्त जरूरत है वह शांति है। दिल्ली विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के अध्यक्ष शिवम परिहार ने बताया कि यूपीएफ द्वारा सेवा के लिए युवा अभियान चलाया जा रहा है जिससे जुड़कर युवा अपने आसपास गांव कस्बा एवं शहर में सप्ताह में एक दिन अपना समय सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा स्वास्थ्य एवं संस्कारवान शिक्षा देकर अपना योगदान दे सकते हैं। डा. कुमारेंद्र सिंह सेंगर ने कहा कि विश्व शांति दिवस के माध्यमसे लोगों में वैश्विक शांति के प्रति जागरूकता लाना आवश्यक है। कार्यक्रम को सेवा दृष्टि संस्था के महासचिव डा. सुभाष चंद्रा भारत रक्षा मंच के जिलाध्यक्ष कुंदन सिंह राठौर प्रवक्ता संतोष राजपूत ने भी संबोधित किया। संचालन महाविद्यालय के प्राचार्य डा. अनुज भदौरिया ने किया।इस अवसर पर नाहित, मुस्ताक, नरेश राजपूत, चंदन सिंह, श्याम करन प्रजापति, नीलेश खरे, हेमंत यादव, लक्ष्मीप्रसाद राजपूत आदि उपस्थित रहे। अंत में अनुरागिनी संस्था के समन्वयक रविंद्र पुरवार ने धन्यवाद व्यक्त किया।

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