0 पचीपुरी शराब ठेके पर मारा छापा
0 सैम्पल के नाम पर आधा दर्जन पेटियां शराब उठा ले गया विभाग
konch1 konch2कोंच-उरई। अबैध शराब बिक्री रोकने के नाम पर आबकारी विभाग अबैध बसूली में संलिप्त नजर आने लगा है, खास बात यह है कि इस विभाग ने कोंच को केन्द्र बना लिया है और आये दिन यहां छापेमारी करके बिना लिखापढी के मामला ऊपर ही ऊपर सुलटा लिये जाने की खबरें आम हैं। आज भी आबकारी टीम ने पचीपुरी स्थित देसी शराब ठेके पर छापा मारा और कमोवेश आधा दर्जन पेटियां अपनी गाड़ी में लाद लीं लेकिन मौके पर पहुंची पत्रकारों की टीम ने जब बरामदगी बताने के लिये कहा तो अधिकारी सकपका गये, बोले इस ठेके पर शराब में पानी मिला कर बेचने की शिकायतें मिल रहीं थीं लिहाजा सैम्पल के लिये शराब ले जाई जा रही है। आधा दर्जन पेटियां क्या बाकई सैम्पल में उठाई गईं हैं या परदे के पीछे कोई और खेल हो रहा है। ग्रामीणों की अगर मानें तो वहां एमपी की शराब बेचे जाने की चर्चा आम है। टीम ने एक भाजपा नेता को भी वहां से बिना किसी लिखापढी के उठाया है।
कल शाम कस्बे के गांधीनगर इलाके में छापा मार कर आबकारी विभाग ने सात पेटियां शराब मध्य प्रदेश की यहां बरामद की थीं, साथ ही एक व्यक्ति वैभव पुत्र चंदनसिंह निवासी गांधीनगर कोंच की गिरफ्तारी भी की थी। बाद में उसका क्या किया, किसी को नहीं जानकारी क्योंकि इस पूरे अभियान की सूचना आबकारी विभाग ने कोतवाली पुलिस को नहीं दी। इधर, आज भी आबकारी टीम ने आबकारी निरीक्षक कमलेश्वर कश्यप व जेएन सिंह की अगुवाई में ग्राम पचीपुरी स्थित देसी शराब ठेके जिसके संचालक राजेशकुमार निरंजन हैं, पर छापा मारा और तकरीबन आधा दर्जन देशी शराब की पेटियां अपनी गाड़ी में लोड कराईं तथा वहां से भाजपा के एक नेता को भी उठाया। इसी बीच मीडिया टीम मौके पर पहुंच गई और उसने छापे में क्या बरामदगी और किसकी गिरफ्तारी की है तो आबकारी टीम सकपका गई। उसका जबाब गले के नीचे नहीं उतरने बाला था, कहा कि उन्हें इस तरह की शिकायतें मिल रहीं थीं कि इस दुकान पर शराब में पानी की मिलावट करके बेची जाती है। अभी तक तो सुना गया था कि सैम्पल में दो-चार-दस शीशियां तो बाजिब हैं लेकिन आधा दर्जन जिनमें पांच से लेकर सात पेटियां तक हो सकती हैं, सैम्पल में लिया जाना पहली बार देखा गया है। जिस भाजपा नेता को टीम गाड़ी में डाल कर ले गई है, उसका दुकान से क्या वास्ता था, यह भी नहीं बताया गया। बहरहाल, सारा खेल परदे के पीछे रह कर खेला जाना सवाल खड़े करने बाला है। बकौल कोतवाली पुलिस उसे इन छापों की कोई खबर नहीं है। नियमतरू आबकारी विभाग को अपनी कार्यवाही के बाद बतौर सूचना कोतवाली को इतना तो बताना ही चाहिये कि उसने क्या बरामदगी की है और किसे गिरफ्तार किया है, लेकिन सबका अपना अपना कानून है, बदन पर बर्दी है, जो जी में आये करने के लिये ये स्वतंत्र हैं।

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