उरई। महिला अपराधों को रोकने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा दिखाई जा रही संजीदगी से पुलिस बेपरवाह बनी हुई है। स्कूल काॅलेज और कोंचिंग सेंटर के शुरू होने और छूटने के समय उनके लिए जाने वाले रास्तों पर मजनुओं पर कड़ी निगरानी रखने की स्टैण्डिंग व्यवस्था तक लचर होना इसकी निशानी है।
मजनुओं और शोहदों का सबसे बड़ा विचरण केंद्र इस समय स्टेशन रोड बना हुआ है। इस रोड पर शाम साढ़े पांच बजे से साढ़े आठ बजे तक बाइक स्टंट करने वाले बिगड़ैल लड़कों का तांडव जारी रहता है। यही समय है जब स्टेशन रोड पर संचालित कई कोचिंग से छात्राओं के झुंड के झुंड निकलते हैं। शरारती लड़के उसी मौके पर नक्शेबाजी दिखाते हुए जिस तरह बाइक चलाते हैं उससे राहगीरों का कलेजा मुंह में आ जाता है। उनकी स्टंटबाजी तो किसी पर भारी पड़ने का खतरा है ही जिस तरह से पुलिस इस मामलें में उदासीन बनी हुई है उसे देखते हुए कोचिंग की छात्राओं के साथ भी कोई हादसा हो जाने का खतरा कम नही है।
पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार त्रिपाठी ने कोतवाली पुलिस को छेड़खानी जैसे अपराध रोकने के लिए जो हिदायतें दी हैं। उनमें कोचिंग सेंटरों के आसपास उनके खुलने और बंद हो जाने के समय गश्त करना भी शामिल है। लेकिन लगता है कि कोतवाली पुलिस एसपी की आंखों में धूल झौंक रही है जिसके कारण उनके निर्देश कागजी साबित किये जा रहे हैं।






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