उरई। अवैध शराब का बड़े पैमाने पर कारोबार चला रहे दो लोगों पर आज बुरी बीती। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट ने दोनों के माामले में ट्रायल पूरा हो जाने के बाद शुक्रवार को दोनों को दस-दस वर्ष की सजा और 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड घोषित कर दिया। जुर्माना न भरने पर उन्हें एक-एक वर्ष की सजा और भोगनी पड़ेगी।
अवैध शराब के धंधे को पिछले कुछ वर्षों से लोग स्वर्ग मानने लगे थे। कई लोग तीन-चार वर्ष में ही इस धंधे से खाक पति से करोड़ पति बन गये। जिसकी देखादेखी शाॅर्टकट में बड़े आदमी का सपना देखने वालों में यह धंधा अपनाने की ललक चरम सीमा पर पहुंच गई थी।
लेकिन आज इस करनी का जो फल विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट मनोज शुक्ला ने उन्हें दिया उससे शराब तस्करों के होश उड़ सकते हैं। कैलिया थाने के नरी निवासी मंशाराम शिवहरे और मुन्ना लाल शिवहरे अवैध रूप से शराब निर्माण कराकर उस पर मध्यप्रदेश की डिस्टलरी का होलोग्राम लगवा देते थे। उनकी लाखों रुपये की नकली शराब हर रोज मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में खप रही थी। लेकिन आखिर में वे पुलिस के हत्थे चढ़ गये।
कैलिया पुलिस ने उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में अवैध शराब बरामद कर 60 एक्साइज एक्ट और 420, 467, 468, 473 व 486 आईपीसी की धाराएं लगाकर उनका चालान कर दिया गया। इसके पहले झांसी जिले के पूंछ थाना ने भी इनका चालान किया था। गिरोहबंद अपराधी के रूप में कैलिया पुलिस ने इन पर गैंगस्टर एक्ट भी तामील कर दिया।
विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट मनोज शुक्ला ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत मजबूत साक्ष्यों को दोष सिद्धि का पर्याप्त आधार मानते हुए दोनों को दस-दस वर्ष कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा का एलान कर दिया। मामले में अभियोजन पक्ष की पैरवी ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी भूपेंद्र कुमार मिश्र और सहायक शासकीय अधिवक्ता मोतीलाल पाल ने की।






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