cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। चुनाव का अवसर ऐसा होता है जब सत्ता इतनी मुलायम हो जाती है कि ऐरे-गैरों तक को पिता-श्री मानने में उसे हिचक नही होती। कुछ ऐसा ही उत्तर प्रदेश विधानसभा के आसन्न चुनाव की बेला में देखने को मिल रहा है। साढ़े चार वर्ष तक जिन गांव वालों को तहसील दिवस में बार-बार आकर भी परेशानी से कोई राहत नही मिलती थी। उनकी सुनवाई अब द्वार-द्वार अधिकारियों को भेजकर कराई जा रही है।
सशक्त गांव, विकसित प्रदेश के नारे के तहत की जा रही इस कवायद में डीएम संदीप कौर स्वयं 29 सितंबर को डकोर ब्लाॅक की जैसारी न्यायपंचायत के जैसारी, बरसार, कमठा व टिमरौं गांवों में जनचैपालें लगवायेंगीं। इसमें दो बातें मुख्य रूप से की जायेंगीं एक तो सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव वालों को रटाना और उनमें यह भ्रम पैदा करना कि अभी तक पात्रों को जो इनका लाभ नही मिला उसके लिए अधिकारियों से कमीशन लेकर उन्हें फ्री हैंड करती रही सरकार जिम्मेदार नही है बल्कि कोई अगोचर शैतान है जिन्होंने जरूरतमंदों की मदद नही होने दी। लेकिन इन शैतानों पर अब सरकार की नजर पड़ चुकी है इसलिए चुनाव तक जरूरतमंदों के साथ कोई चूक नही होने दी जायेगी।
दूसरा मकसद रहेगा उन पीड़ितों को मौके पर ही मदद प्रदान करना जिनके जायज अधिकार कुचले गये हैं लेकिन हर फोरम पर जिनकी आवाज इसके पहले अरण्यरोदन की तरह अनसुनी हो जाती थी। नाना पाटेकर की फिल्म के बलमा बेइमान हमें पुटयाने आये हैं की तर्ज के इस तमाशे से सत्तारूढ़ पार्टी को चुनाव में कितनी मदद मिल पाती है यह बता पाना नतीजा आने के पहले मुश्किल है।
उधर मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह इसी दिन कदौरा विकास खंड की बबीन न्याय पंचायत में इटौरा, बाबनी, बबीना, बागी, कठपुरवा, मवई अहीर और मदरालालपुर में ऐसी ही चैपाल जोड़ेंगे।

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