उरई। एक स्कूल ने कंप्यूटर शिक्षक के रूप में अपने लोगों की भर्ती की व्यवस्था पहले से तय कर ली। लेकिन औपचारिकता के लिए उसे अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराना पड़ा। इसे पढ़कर अर्ह बेरोजगारों द्वारा भेजे गये रजिस्टर्ड आवेदन विद्यालय से बिना किसी कारण के वापस लौटा दिये गये। पीड़ितों ने जिला विद्यालय निरीक्षक से इसकी शिकायत की लेकिन काफी दिन बाद भी उनके द्वारा कार्रवाई करने में की जा रही टालमटोल से यह उजागर हो गया है कि इस धांधली में उनकी भी पूरी-पूरी मिली भगत है।
भुक्तभोगी आवेदक कालपी कस्बे के मोहल्ला हरीगंज निवासी अनुराग पाठक ने बताया कि कालपी में ही सदर बाजार स्थित सरस्वती विद्यामंदिर का कंप्यूटर शिक्षक की नियुक्ति के लिए एक विज्ञापन दैनिक आज में 27 मई को प्रकाशित हुआ था। जिस पर उन्होंने आवश्यक प्रमाणपत्रों के साथ 10 जून को रजिस्टर्ड डाक के जरिए आवेदन पत्र भेजा, लेकिन यह आवेदन पत्र 13 जून को संबंधित विद्यालय से बिना किसी कारण के वापस करा दिया गया। उन जैसे कई बेरोजगारों के साथ हुई इस चीटिंग ने उन्हें क्षुब्ध कर दिया।
नतीजतन उन्होंने उक्त विद्यालय को बेनकाब करने के लिए 17 जून को जनसूचना अधिकार के तहत रजिस्टर्ड डाक से विद्यालय को कुछ जानकारियां देने के लिए प्रार्थना पत्र भेजा। विद्यालय प्रबंधन ने फिर पुराना व्यवहार दोहराया और इस आवेदन को भी 20 जून को ले जाने से इंकार लिखवाकर उन्हें वापस भिजवा दिया।
अनुराग पाठक ने कहा कि इस तरह की हरकत न केवल अनैतिक बल्कि गैर कानूनी भी है। जिसको देखते हुए उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक से मिलकर शिकायत की। लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नही की जा रही। उन्होंने कहा कि जनसूचना अधिकार अधिनियम का पालन न कराने की वजह से इस कोताही पर डीआईओएस के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। इस बारे में वे राज्य सूचना आयोग, माध्यमिक शिक्षा मंत्री, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को ज्ञापन भेज रहे हैं।







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