उरई। पल्स कंपनी के एजेंटों ने मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट के यहां जाकर निवेशकों से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई। डीएम ने सभी सर्किलों के पुलिस अधिकारियों को उनके ज्ञापन पर आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा है।
एसओ के बैनर तले संगठन के अध्यक्ष अमर सिंह जागीड़ और महामंत्री सुरेश कुमार वर्मा के नेतृत्व में सिटी मजिस्ट्रेट से मिलने गये पल्स ग्रीन के ऐजेंटों ने उन्हें बताया कि उनकी कंपनी 13 फरवरी 1996 से रजिस्टर्ड है। सेबी के द्वारा 22 अगस्त 2014 को किये गये हस्तक्षेप की वजह से कंपनी का करोबार अवरुद्ध हो गया था। इस संबंध में उच्चतम् न्यायालय में पूर्व न्यायाधीश आरएन रोड़ा की अध्यक्षता में 2 फरवरी 2016 को एक कमेटी गठित की थी। जिसे 6 महीने में कंपनी की प्रापर्टी बेंचकर सभी निवेशकों को उनकी डिपोजिट मय ब्याज वापिस कराने का जिम्मा सौंपा गया था। इसके अमल में विलंब होने पर पल्स ग्रीन के एजेंटों ने 31 जुलाई से 3 अगस्त तक दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना दिया। जिसके बाद केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने दो महीने में निवेशकों की डिपोजिट वापसी का आश्वासन दिया था।
उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से जाहिर है कि निवेशकों को धन वापस न मिल पाने में उनका कोई दोष नही है। लेकिन इसके बावजूद एजेंटों को उनके द्वारा उत्पीड़ित होना पड़ रहा है। निवेशकों द्वारा आये दिन घर आकर की जाने वाली गाली-गलौज की वजह से कई एजेंट आत्महत्या तक की सोचने लगे हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि अगर उनका पक्ष सही है तो प्रशासन की उनसे सहानुभूति है और उनकी नियमानुसार मदद की जायेगी। ज्ञापन देने वालों में मंगलदास कुशवाहा, अरविंद कुमार राठौर, मिस्टर सिंह, रामरूप निषाद, अवधेश कुमार तिवारी, अमर चंद्र बौद्ध आदि भी शामिल थे।






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