उरई। नवरात्र में भक्ति के जुनून में हदें पार करने वाले जोशीलों को अब खबरदार होना पड़ेगा। जिला मजिस्ट्रेट संदीप कौर ने उच्चतम् न्यायालय के उस आदेश का स्मरण कराया जिसमें रात्रि 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर और डीजे जैसे शोरगुल वाले साधनों को बंद रखने की हिदायत दी गई है।
जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि यह सिर्फ सलाह नही है बल्कि इस आधार पर दंडनीय कानून बन चुका है। जिसमें पांच साल तक का कारावास और 1 लाख रुपये तक अर्थदंड की सजा दी जा सकती है। भक्ति को भी इंज्वाॅय में शामिल करने वाले अतिउत्साहियों के कारण लोगों की रात की नींद हराम होने की आ रही शिकायतों के बाद जिलाधिकारी को ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए बनाये गये कानून की याद दिलानी पड़ी।
लोगों की आस्था से जुड़े मामले की नजाकत को समझते हुए उन्होंने इस संबंध में जारी चेतावनी पत्र में पर्याप्त एतिहात बरता है। इसके लिए सीधे-सीधे कानून की एलओसी पार करने वाले भक्तों को इंगित करने की बजाय धार्मिक व मांगलिक कार्यों के लिए सुबह 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग करने की बात उन्होंने कही। उन्होंने कहा कि इस अवधि में भी लाउडस्पीकर और डीजे बजाने के लिए प्रशासन के सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी पड़ेगी।







Leave a comment