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जालौन-उरई। रामलीला महोत्सव-2016 के आठवें दिन केवट संवाद, दशरथ मरण तथा भरत मिलाप की लीला का मंचन किया गया। जिसमें सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र राम-केवट संवाद रहा। तो वहीं, हास्य कलाकार सुभाष मस्ताना द्वारा अपनी कला का प्रदर्शन कर जनता को मंत्रगुग्ध किया गया।
रामलीला महोत्सव में 169 वें मंचन के 8वें दिन राम-केवट संवाद का प्रथम दृश्य अवलोकन कराया गया। जिसमें प्रभु राम को गंगा पार जाने के लिए नाव की जरूरत थी। तो वहीं केवट उनके चरणों को धोने के लिए आतुर था। इसी संवाद में बैठे दर्शकों ने खूब आनंद उठाया। केवट द्वारा कहा गया ‘कुछक तुमऊ काले, कछुक हमऊ काले, आज खूबईं मिलाए दो काले-काले।’ इसी प्रसंग को लेकर राम व केवट के बीच जमकर तकरार होती रही। अंत में ‘सुन केवट के बैन, प्रेम लपेटे अटपटे, बहसै करूना अयन, चितय जानकी लखन तनय’ के साथ प्रभु राम केवट की जिद को स्वीकार कर अपने चरणों को स्पर्श करवाकर नाव से उस पार चले गए। इससे पूर्व, प्रभु राम ने मंत्री सुमंत को वहीं से वापस भेज दिया। जब सुमंत के अकेले वापिस आने की सूचना जैसे ही राजा दशरथ को मिली, उसी समय उन्होंने अपने प्राणों का परित्याग कर दिया। जब यह समाचार भरत तथा शत्रुध्न को भेजा गया, तो वह अपने ननिहाल से अयोध्या आए और अपने बड़े भाई श्रीराम को न देखकर दुःख प्रकट करते हुए राम को मनाने के लिए चल दिए। रामलीला मंचन में केवट की भूमिका पं. रमेश द्विवेदी, राम राहुल त्रिपाठी बांदा, लक्ष्मण केके शुक्ला, निषादराज सुरेंद्र पाराशर तथा सुमंत की भूमिका राजकुमार मिझौना ने निभाई। तो वहीं महिला नृत्यकार गुंजा रानी लखनऊ तथा हास्य कलाकार सुभाष मस्ताना ने अपनी-अपनी कला का प्रदर्शन कर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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