cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce1.pngउरई। उच्चतम् न्यायालय द्वारा अवैध खनन की सीबीआई जांच के मामले में पास पलट देने से जिले के वरिष्ठ अधिकारी असमंजस में घिर गये हैं। इसके पहले सीबीआई की जांच शुरू होते ही जिले में सभी सर्किल आॅफीसरों से उनके क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन की एतिहात के तौर पर रिपोर्ट मांगी गई थी। रणनीति यह थी कि इस आधार पर संबंधित थानाध्यक्षों को हटाकर सीबीआई की अपने खिलाफ संभावित कार्रवाई निष्फल करने के लिए रक्षा कवच तैयार किया जा सके।
राजनीतिक दबाव और व्यक्तिगत प्रलोभन में मौरंग की अवैध खनन के कीचड़ में जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने भी अपने हाथ गंदे कर लिए थे। सीबीआई जांच की तलवार लटकते ही उनके होश फाख्ता हो गये। सीबीआई की गाज उन पर गिरे इसके पहले ही मातहतों को बलि का बकरा बनाकर खुद साफ निकल जाने की रणनीति का तानाबाना बुना गया। इसी के तहत सभी सर्किल आॅफीसरों से अपने-अपने क्षेत्र के थानों की छानबीन करने के निर्देश दिये गये। सर्किल आॅफीसरों ने किस थाना क्षेत्र में किस जगह अवैध खनन हो रहा है और इस कारगुजारी में संबंधित थाना कोतवाली प्रभारी की किस तरह मिली भगत प्रतीत होती है इन बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट पुलिस कप्तान को सौंप दी थी। इसके बाद कोतवाल और थानेदारों के चार्ज पर तलवार चलानी शुरू भी हो चुकी थी लेकिन शुक्रवार को उच्चतम् न्यायालय ने राज्य सरकार को राहत देते हुए उत्तर प्रदेश में अवैध खनन की सीबीआई जांच को रोक दिया। खतरा टल जाने के बाद भी क्षेत्राधिकारियों की छानबीन में दागी बताये गये थाना कोतवाली प्रभारियों पर कार्रवाई जारी रखी जाये या बला टलने के बाद रिपोर्ट को बेफजूल समझकर ठंडे बस्ते में खिसका दिया जाये इस पहलू पर पुलिस कप्तान पशोपेश में बताये जाते हैं।
उच्चतम् न्यायालय के आदेश की प्रति राज्य सरकार के स्तर पर अभी उपलब्ध नही हो पाई है जो स्थानीय अधिकारियों के संशय का मुख्य कारण है। मीडिया रिपोर्टस में कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने जो प्रारंभिक जांच रिपोर्ट दाखिल की थी उसका गहन अवलोकन करके फिर कोई आदेश पारित करने का फैसला उच्चतम न्यायालय ने सुनाया है। जिसकी वजह से अभी खतरा टला हुआ मान लेना निरापद नही है। इसी बिंदु पर जिले में विचार विमर्श किया जा रहा है।
बहरहाल उच्चाधिकारियों की धारणा यह है कि सीबीआई की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार यह जबाव दाखिल करेगी कि अवैध खनन में उसकी कोई संलिप्तता नही थी जिसका सुबूत यह है कि अवैध खनन की जानकारी मिलते ही संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई कर दी जाती थी। राज्य सरकार की इस सफाई को कोतवाली थाना प्रभारियों को पैदल करने का एक्शन बल प्रदान करेगा। इसलिए क्षेत्राधिकारियों की रिपोर्ट पर उनके खिलाफ प्रताड़नात्मक कार्रवाई कर शासन को इसकी सूचना भेजना अधिक मुफीद माना जा रहा है। अधिकारियों का विश्वास है कि इससे शासन उनकी पीठ ठोंककर हौसला अफजाई भी करेगा।

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