0 बालि वध लीला में शबरी की रामभक्ति और राम-सुग्रीव मैत्री का हुआ मंचन
konch1 konch2 konch3कोंच-उरई। रामलीला के बालिवध प्रसंग से पूर्व सीता अन्बेषण में निकले राम ने अपनी परम भक्त भीलनी शबरी को दर्शन देकर और उसके जूठे बेर खाकर समाजवाद की आधारशिला त्रेता युग में ही रख दी थी। शबरी के बताये अनुसार ही राम ने भाई के त्रास से छिपकर रह रहे सुग्रीव से मैत्री कर एक और उम्दा उदाहरण दबे कुचलों की मदद करने का प्रस्तुत किया। वचन के पक्के राम ने बालि का बध कर सुग्रीव के प्रति अपना मित्र धर्म निभाया और उसे किष्किंधा का राजा बनाया। परमात्म तत्व में विलीन होने जा रहे बालि की अंतिम इच्छा पूरी करते हुये राम ने उसके बेटे अंगद को किष्किंधा का युवराज भी बनाया।
कोंच के 164वें रामलीला महोत्सव में बीती रात्रि रामलीला रंगमंच पर बालि बध लीला का रोमांचक मंचन देख दर्शक अभिभूत हो उठे। अभिनय विभाग के अध्यक्ष रमेश तिवारी व मंत्री नरोत्तम स्वर्णकार के निर्देशन में मंचित रामलीला का यह प्रसंग आज समाज में फैलते जातीय और वर्गीय विद्वेष पर करारा प्रहार करने बाला है जिसमें भगवान राम ने कथित रूप से क्षुद्र जाति की भीलनी शबरी का न सिर्फ आतिथ्य स्वीकार किया बल्कि प्रेमातिरेक में शबरी द्वारा खिलाये गये जूठे बेरों को भी बहुत ही प्रेम पूर्वक ग्रहण किया। राम-सुग्रीव मैत्री भी यह दर्शाने के लिये काफी है कि बलवान का मित्र बनने के बजाय समाज के सताये और तिरस्कृत लोगों को संबल प्रदान करके ही सामाजिक एकता और समरसता को अक्षुण्ण रखा जा सकता है। शबरी के सुझाव पर राम वानरों के राजा सुग्रीव से मैत्री करते हैं। प्रभु श्रीराम शबरी को नवधा भक्ति का ज्ञान देकर सुग्रीव से मिलने ऋष्यमूक पर्वत पर जाते हैं जहां उनका साक्षात्कार हनुमान से होता है और राम-सुग्रीव मैत्री के बाद राम सुग्रीव को दिये वचनानुसार बालि के ऊपर वृक्ष की ओट लेकर वाण चला देते हैं, घायल पड़ा बालि अपने अहंकार में कहता है, बालि का विनाश नहीं यह वीरता का ह्रास है, विश्व में खलों के मान दर्प बढ जायेंगे। पूजा नित्य होगी शंख झालर बजेगी, मंदिरों में आपकी प्रतिमा पधरायेंगे, किंतु हे नाथ कलंक के अंक सिर से न मिट पायेंगे..। इस प्रकार राम राम का उच्चारण करता बालि राम के धाम को चला गया। प्रभु राम सुग्रीव को किष्किंधा का राजा और अंगद को युवराज घोषित कर देते हैं। मंचन के दौरान श्रृंगार और सिखावन गीतों प्रणय के देवता तुम पर है बलिहारी सदा तारा…, कोयल कूक रही मदमाती, कोयल…, समुझ मोरे सैंया, पैंयां पड़ूं कर जोर… ने रामलीला का आनंद और भी बढाया। बालि कृष्णकांत वाजपेयी, सुग्रीव दीपू स्वर्णकार, शबरी वीरेन्द्र त्रिपाठी, तारा गौरीशंकर झा, हनुमान अभिषेक रिछारिया ने निभाये।
कोंच रामलीला में आज-
रावण के दरबार में युद्ध की घोषणा करेगा अंगद
konch4सीता अन्बेषण के पश्चात् मित्र बने रावण के अनुज बिभीषण के कहने पर राम एक और मैत्री प्रस्ताव रावण के पास भेजने के लिये अंगद को शांतिदूत बना कर लंका भेजते हैं जहां रावण और अंगद के बीच गर्मागर्म संवादों के बाद अंगद ने राजसभा में अपना पैर जमा दिया और चुनौती दी कि कोई अगर उसका पैर उठा देगा तो राम सेना बगैर युद्घ के बापिस चली जायेगी। रावण के बली और अतिबली भी जब अंगद पैर को उठा पाने में विफल रहते हैं तो अंगद युद्ध की घोषणा कर बापिस राम के सैन्य शिविर में लौट जाते हैं। उक्त प्रसंग कल 9 अक्टूवर को रात्रि 8 बजे रामलीला रंगमंच पर मंचित किया जायेगा।

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