उरई। दलित उत्पीड़न के भुक्तभोगियों को समाज कल्याण विभाग के दुस्साहसी बाबू की गलत मानसिकता की वजह से निर्धारित क्षतिपूर्ति नहीं मिल पा रही, जबकि इस मामले में स्वयं बाबू के खिलाफ एससी एसटी एक्ट का मुकदमा कायम हो सकता है। लेकिन ढीलेढाले प्रशासन की वजह से बाबू को इसका कोई खौफ नहीं है।
रामपुरा थाने के ग्राम टीहर की निवासी एक दलित किशोरी को गांव के ही युवक दिनेश कुमार राठौर ने छैककर 27 अगस्त 2014 को छेड़खानी की घटना कर दी थी। दलित उत्पीड़न के मामलों में प्रशासन और पुलिस के अपने पूर्वाग्रह हैं। जिनसे आजादी के इतने दिनों बाद भी सरकारी महकमें उबर नहीं पाए हैं। इसलिए पुलिस ने काफी टालमटोल के बाद 29 अगस्त को यह मुकदमा लिखा। किशोरी के पिता की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। ज्यादातर दलितों की यही कहानी होने की वजह से एससी एसटी एक्ट के मुकदमे में वादी को 15 दिन के अन्दर दर्ज धाराआंे के मुताबिक मुआवजे की पहली किस्त उपलब्ध करा देने की व्यवस्था की गई है ताकि पैसे की कमी की वजह से पीड़ित को आतताई के सामने सरण्डर न करना पड़ जाए, पर इस मामले में आजतक वादी को मुआवजे का एक रुपया भी नसीब नहीं हो सका। वादी ने जब समाज कल्याण विभाग में संपर्क साधा तो मालूम हुआ कि मई 2015 में ही पुलिस ने चार्जशीट तक भेजे जाने की सूचना समाज कल्याण विभाग में दाखिल कर दी थी। लेकिन समाज कल्याण विभाग इस पर कुंडली मारकर बैठ गया है।
इस पर वादी समाज कल्याण विभाग पहुंचा जहां अधिकारी ने अपने बाबू त्रिवेदी को उसकी बात सुनकर बताने के लिए निर्देशित कर दिया। लेकिन अधिकारी के कक्ष से बाहर आते ही त्रिवेदी बाबू साहब से ऊपर के भी साहब का अब्बा अपने को साबित करने में लग गया। उसने जितना हो सकता था। उतना पीड़ित को जलील किया। जिसकी वजह से पीड़ित अपना सा मुंह लेकर चला गया। बाद में उसने लोगों के कहने पर 7 सितम्बर 2016 को डीएम साहिबा से संपर्क साधा। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के लिए लिख दिया। पीड़ित यह सोचकर कि समाज कल्याण का ़ित्रवेदी इसके बाद पटरी पर आ गया होगा, फिर समाज कल्याण विभाग में पहुंचने का गुनाह कर बैठा। वहां त्रिवेदी से वह समाज कल्याण अधिकारी के कक्ष के बाहर ही टकरा गया। छूटते ही त्रिवेदी ने उसे जाति सूचक शब्दों से नवाजते हुए जितना हो सकता था उतनी गालियां दीं और कहा कि अब तू एक मुकदमा मेरे खिलाफ भी लिखवा दे। लेकिन डीएम कहें या कमिश्नर वह तुझको विभाग से एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिलने देगा। पता चला है कि इसके बाद जब त्रिवेदी का पटल बदला तो उसने अपनी जगह चार्ज लेने वाले राम सिंह को इसी प्रतिशोध मंे टीहर वाले की फाइल नहीं सौंपी किसी तरह राम सिंह को इसका पता चल गया। तो वे खुद ही त्रिवेदी से फाइल मांगने पहुंच गए। बहरहाल वकील की फीस न भर पाने की वजह से टूटकर जालिम के आगे ही पनाह मांगने के लिए पीड़ित अपने को जबरा त्रिवेदी की हरकत की वजह से मजबूर पा रहा है।

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