कोंच। कोंच की 164 बर्ष पुरानी ऐतिहासिक रामलीला के मैदानी आयाम ही इसे देश की अन्य रामलीलाओं से अलग करते हैं और इन्हीं की बिनाह पर अयोध्या शोध संस्थान ने कोंच की रामलीला को देश की सर्वश्रेष्ठ मैदानी रामलीला का खिताब बर्ष 2009 में सर्वे के आधार पर प्रदान किया था। कल सोमवार को रामलीला का तीसरा और अंतिम मैदानी आयाम दशहरा मेला धनुताल के विशाल ग्राउंड में संपन्न होगा और इसके लिये डील निर्माण में जुटे कारीगर पुतलों को अंतिम रूप देने में पूरी शिद्दत के साथ जुटे हैं।
कोंच की रामलीला की सबसे बड़ी और अनूठी खासियत यह है कि दशहरा मेला में रावण-मेघनाद के पुतलों को खड़ा करके नहीं दहन किया जाता है बल्कि बाकायदा गाडिय़ों पर कस कर उन्हें मैदान में दौड़ाया जाता है और राम-लक्ष्मण के साथ उनके सजीव युद्घ का चित्रण प्रस्तुति करने की मंशा आयोजन के प्रादुर्भावकालीन आयोजकों की रही होगी। इसीलिये पुतले तैयार में इस बात का बिशेष ध्यान रखा जाता है कि वे काफी मजबूत हों और उनमें कम से कम एक से डेढ घंटे तक दौड़ पाने की क्षमता हो। इन पुतलों को तैयार करने में परंपरागत रूप से मुस्लिम विरादरी के लोगों की सहभागिता ही ज्यादा रही है और लोग पीढियों से इस काम को अंजाम देते आ रहे हैं। पहले इन पुतलों का निर्माण सल्ले और वहीद की टीमें किया करती थी लेकिन अब नई पीढी के लोग भी इस कार्य में दखल रखने लगे हैं। अबकी दफा डील बनाने की जिम्मेदारी बलराम बरार को दी गई है जो हाजी हुसैन बख्श के कुशल निर्देशन में पुतलों को अंतिम रूप देने में लगे हैं। फिलवक्त बलराम के साथ काले कुरैशी, जफर कुरैशी सहित कई किशोर भी कार्य कर रहे हैं।






Leave a comment