cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngजालौन-उरई। एक ओर जहां केंद्र सरकार बड़े-बड़े उद्योगपतियों के कर्जे माफ कर रही है। तो वहीं दूसरी ओर दैवीय आपदा की मार से पहले से ही भुखमरी की कगार पर आ पहुंचे किसानों के खेतों में जब बखराई आदि का कार्य आया है जिसमें ट्रैक्टर आदि से बुआई आदि कराने पर उसे डीजल की आवश्यकता पड़ती है। तब केंद्र सरकार ने डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी कर किसानों पर एक बार फिर से कुठाराघात किया है। यह बात पूर्व राज्यसभा सांसद ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान कही। उन्होंने किसानों के हित में केंद्र सरकार से डीजल के बढ़े हुए दामों को वापस लिए जाने की मांग भी की।
पूर्व राज्यसभा सांसद श्रीराम पाल ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहा कि गत कई वर्षोंसे अतिवृष्टि, अनावृष्टि, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से फसलें बरबाद होती आ रही हैं। ऐसे में किसान बदहाली व रूपयों की तंगी से परेशान है। फसलें नष्ट होने से किसानों के सामने भोजन व पशुओं के चारे की समस्या मुंह बाए खडी है। अब जबकि खेती का कार्य अलाभकर साबित हो चुका है। फिर भी किसान बैंकों से व साहूकारों से कर्ज लेकर किसी तरह रवी की फसल की बुवाई की तैयारी में लगा है। ऐसे में किसानों के लिए कंगाली में आटा गीला की कहावत चरितार्थ इसलिए हो रही है कि सरकार ने ऐसे समय में डीजल पर 2.37 रूपए प्रति लीटर दाम बढ़ा दिए हैं। अब किसान खेतों में जुताई, बखराई एवं बुवाई ट्रेक्टरों के जरिए कैसे करे। क्योंकि डीजल के दाम बढ़ने से किसानों को अब ज्यादा भाड़ा देना होगा। एक ओर जहां केंद्र सरकार बड़े बड़े उद्योगपतियों के कर्जे माफ कर रही है तो फिर किसानों का हित देखते हुए डीजल पर बढ़ी हुई कीमत सरकार स्वयं तेल कंपनियों को अदा क्यों नहीं कर रही है। केंद्र सरकार का किसान विरोधी चेहरा उजागर हो चुका है। आखिर किस डर से तमाम राजनैतिक दल किसान विरोधी कें्रद सरकार का विरोध नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सदन में बैठे सभी सांसद विधायक जिसकी दम पर सभी सुख सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। उसी किसान की हालत आज काफी दयनीय है। उसे दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल पड़ रहा है। श्री पाल ने कहा कि सभी दलों को दलगत राजनीति से उठकर किसानों के हितों में केंद्र की सरकार पर दबाव डालकर बढ़ी हुइर्द पेट्रोल व डीजल की कीमतें वापस लेने की मांग करनी चाहिए। तभी किसानों का भला होगा।

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