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0 मामला मिछले दिनों अंडा में हुये वृद्घ के कत्ल का
0 दो सगे भाई जेल जा चुके हैं इस मामले में
0 मृतक के बेटे का आरोप, वास्तविक आरोपियों को बचा रही है पुलिस
कोंच-उरई। कानून कहता है कि भले ही गुनाहगार छूट जाये लेकिन किसी बेगुनाह को सजा नहीं मिलनी चाहिये, लेकिन यहां तो मामला ही दूसरा है। कत्ल जैसे संगीन अपराध में बेगुनाहों को जेल भेजने और गुनहगारों को बचाने की तोहमत मढी जा रही है कोतवाली पुलिस पर। पिछले दिनों कोतवाली क्षेत्र के ग्राम अंडा में हुये वृद्घ के कत्ल के आरोप में पुलिस द्वारा किये गये खुलासे और दो लोगों को जेल भेजे जाने के मामले में मृतक के बेटे ने ही ऐसे सवाल खड़े किये हैं। उसका आरोप है कि पुलिस वास्तविक हत्यारों को बचाने की कोशिश में जुटी है और लो दो सगे भाई जेल गये हैं उनमें कम से कम एक तो बेगुनाह है ही और जिनका इस हत्या में हाथ होने की आशंका है पुलिस उन्हें छू भी नहीं रही है, वारदात के बाद से ही ये संदिग्ध गांव नहीं आये हैं।
गुजरी 24-25 सितंबर 2016 की रात्रि तकरीबन बारह बजे कोतवाली क्षेत्र के ग्राम अंडा में 65 वर्षीय वृद्ध धनसिंह कुशवाहा पुत्र लीलाधार की धारदार हथियारों से बड़ी ही नृसंश तरीके से हत्या कर दी गई थी। इस मामले की सूचना मृतक के पुत्र उमाशंकर ने अज्ञात हत्यारों के खिलाफ कोतवाली पुलिस को दी थी। मौके पर मिले एक मोबाइल फोन के आधार पर पुलिस ने संदेह में गांव के ही सुरेन्द्र (25) पुत्र अशोक राठौर को पूछताछ के लिये हिरासत में लिया था, बाद में उसके भाई अनूप को भी पुलिस ने कोतवाली बुलवा लिया। इसके बाद पुलिस ने काम निपटाने की गरज से इस अंधे कत्ल का खुलासा करते हुये दोनों भाईयों को जेल भेज दिया। इसके बाद समझा गया कि मामले का पटाक्षेप हो गया है लेकिन यह सारा खुलासा उस वक्त सवालों से घिरता नजर आया जब मृतक धनसिंह के बेटे उमाशंकर ने एसपी जालौन को शिकायती पत्र देकर कहा कि उक्त घटना का आधा अधूरा खुलासा पुलिस ने किया है और असली आरोपियों को साफ बचाने में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। उसका आरोप है कि पुलिस ने 27 सितंबर को उसके बेटे अंगद पुत्र उमाशंकर से तीन लोगों सुरेन्द्र, अनूप पुत्रगण अशोक राठौर तथा अशोक राठौर पुत्र मिट्ठूलाल की नामजदगी कराते हुये एक तहरीर ले ली और एक तीसरे संदिग्ध जिसे पुलिस ने हिरासत में लिया था, को ससम्मान कोतवाली से जाने दिया गया। उमाशंकर इस खुलासे को लेकर कतई संतुष्ट नहीं है, उसका कहना है कि असली मुल्जिम गांव से अभी भी फरार हैं जिन पर पुलिस हाथ नहीं डाल रही है। उसका यह भी कहना है कि जो मोबाइल मौका-ए-वारदात से बरामद हुआ था उसके कॉल डिटेल्स निकाल कर हकीकत का पता लगाया जाना चाहिये था लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया, यहां तक कि हत्या में प्रयुक्त हथियार तक पुलिस नहीं बरामद कर सकी है, जो हथियार पुलिस दिखा रही है उसे प्लांट किया गया है। बहरहाल, मृतक के बेटे के इन गंभीर आरोपों के बाद इतना तो तय है कि पुलिस के खुलासे में छलनी की तरह छेद ही छेद हैं और अगर जेल गये अभियुक्त गलत हैं तो इसे पुलिस की नाकामी ही कहा जायेगा जो वह असली हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी है, या नहीं पहुंचने का स्वांग कर रही है। उमाशंकर ने समूचे मामले की शिकायत केन्द्रीय गृहमंत्री, मानवाधिकार आयोग, मुख्य सचिव उत्तरप्रदेश शासन तथा मंडल आयुक्त झांसी को भी भेजी है।

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